बस्तर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू ‘पूना मारगेम’ ने बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हिंसा के समाधान के लिए संवेदनशील, मानवीय और समावेशी दृष्टिकोण का प्रतीक है।
पूना मारगेम: नया रास्ता और इसकी विचारधारा
स्थानीय गोंडी भाषा में ‘पूना मारगेम’ का अर्थ है ‘नया रास्ता’। यह नीति उन युवाओं और कैडरों के लिए मार्ग प्रशस्त करती है जिन्हें कभी हथियार उठाने के लिए मजबूर किया गया था। इसकी तीन मुख्य आधारशिलाएँ हैं:
- संवाद और संवेदनशीलता – बंदूक के जवाब में बंदूक नहीं, बल्कि भरोसा और बातचीत।
- विकास – शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, रोजगार और संचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन।
- हिंसा का प्रभावी समाधान – आत्मसमर्पण और पुनर्वास के माध्यम से हिंसा को समाप्त करना और नई जिंदगी देना।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नेतृत्व
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का अंत केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नहीं होगा, बल्कि जनविश्वास जीतकर ही स्थायी शांति लाई जा सकती है। उनका दृष्टिकोण “कठोरता जहां आवश्यक, करुणा जहां परिवर्तन संभव” है।

ऐतिहासिक आत्मसमर्पण और बस्तर में नई सुबह
राज्य सरकार की सतत नक्सल उन्मूलन नीति के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में 210 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इसमें मुख्य रूप से एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य और 21 डिविजनल कमेटी सदस्य शामिल थे। 153 अत्याधुनिक हथियारों का समर्पण यह दर्शाता है कि नीति कितनी प्रभावी रही।
बीजापुर में सफलता: 16 दिसंबर 2025 को बीजापुर जिले में 34 माओवादी कैडरों ने 84 लाख रुपए के इनाम के साथ आत्मसमर्पण किया। मुख्यमंत्री साय ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप प्रयासों का परिणाम बताया।
पुनर्वास और नया जीवन
‘पूना मारगेम’ के तहत आत्मसमर्पित लोगों को आवास, पुनर्वास सहायता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान और नया जीवन देने की प्रतिबद्धता है।

संविधान और लोकतंत्र का सम्मान
आत्मसमर्पित कैडरों को संविधान की प्रति और लाल गुलाब भेंट कर लोकतंत्र की श्रेष्ठता का संदेश दिया गया। यह दर्शाता है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान सर्वोच्च है।
बस्तर में स्थायी बदलाव
सुरक्षा बल, प्रशासन, सामाजिक संगठन और जनजातीय नेतृत्व के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की नई सुबह आई है। स्कूल फिर से खुल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं, मोबाइल नेटवर्क गाँव-गाँव तक पहुंच रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रही हैं।
