Coming of Cat in the House: नई दिल्ली। भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में जानवरों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं में से एक है घर में बिल्ली का आना। आमतौर पर लोग इसे साधारण घटना मान लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार बिल्ली का घर में प्रवेश, उसका व्यवहार और यहां तक कि उसके बच्चों का जन्म भी कई संकेत देता है। माना जाता है कि यह संकेत परिवार के भाग्य और आने वाले समय के शुभ-अशुभ परिवर्तनों का इशारा कर सकते हैं।
घर में बिल्ली का प्रवेश क्यों माना जाता है खास?
वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्ली का घर में आना संयोग नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। सुनहरी बिल्ली का आगमन अत्यंत शुभ माना गया है। इससे घर में सफलता के नए द्वार खुलते हैं और परिवार की उन्नति के योग बनते हैं। वहीं, भूरी बिल्ली का आना अचानक धन लाभ, आर्थिक प्रगति और रुके हुए कामों के पूर्ण होने का संकेत देता है। इसीलिए कई परिवार बिल्ली को शुभ संदेशवाहक मानते हैं।
बिल्ली द्वारा घर में बच्चों का जन्म कितना शुभ?
वास्तु शास्त्र में सबसे शुभ घटना मानी जाती है—घर में बिल्ली द्वारा बच्चों का जन्म। मान्यता है कि अगर बिल्ली घर में आकर बच्चे देती है, तो अगले 90 दिनों तक उस परिवार पर सौभाग्य और समृद्धि का प्रभाव बना रहता है। छोटे-छोटे बच्चों की मौजूदगी से घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मक शक्तियाँ स्वतः समाप्त होने लगती हैं। माना जाता है कि जब तक बिल्ली के बच्चे घर में रहते हैं, तब तक परिवार खुशहाली से भर जाता है।
बिल्ली का रोना क्यों माना जाता है चेतावनी?
लोक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई बिल्ली अचानक घर में आकर रोने लगे, तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। इसे किसी अप्रिय घटना या नकारात्मक ऊर्जा की ओर इशारा समझा जाता है। ऐसी स्थिति में धार्मिक उपाय करने और मानसिक शांति बनाए रखने की सलाह दी जाती है, ताकि संभावित नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके।
क्या बिल्ली को पालतू बनाना सही है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार बिल्ली का घर में आना शुभ हो सकता है, लेकिन उसे स्थायी रूप से पालतू बनाकर रखना ठीक नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्ली को हमेशा घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, जिससे धन हानि, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
