वाशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही ट्रेड डील को लेकर अब भी कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल लगातार वार्ता और मसौदा तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों खासकर कृषि, ऑटोमोबाइल और डेयरी सेक्टर में मतभेद बने हुए हैं।
इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर 35% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी, और इससे एक दिन पहले उन्होंने ब्राजील सहित अन्य देशों पर भी टैरिफ बढ़ा दिए थे। इससे वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है।
भारत पर टैरिफ 20% से अधिक नहीं होगा
सूत्रों के मुताबिक, भारत के साथ संभावित ट्रेड डील के तहत टैरिफ दरें 10% से 20% के बीच सीमित रह सकती हैं। ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका अपने व्यापारिक साझेदारों पर 20% से अधिक टैरिफ नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा, “हर किसी को पत्र भेजना जरूरी नहीं है, हम अपने टैरिफ खुद तय कर रहे हैं।” इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि भारत-अमेरिका डील होती है, तो टैरिफ की अधिकतम सीमा 20% ही रहेगी, जो व्यापार के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन रवाना होगा
भारत सरकार ने बातचीत के अगले दौर की तैयारी शुरू कर दी है। खबर है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वाशिंगटन रवाना होगा, जहां अमेरिकी अधिकारियों के साथ व्यापारिक समझौते के मसौदे पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, कृषि, ऑटो और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिका द्वारा टैरिफ में कटौती की मांग पर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
भारत की स्पष्ट नीति: घरेलू हित सर्वोपरि
भारत का मानना है कि इन प्रमुख क्षेत्रों से किसानों, लघु उद्योगों और श्रमिकों की आजीविका जुड़ी हुई है, इसलिए इन पर किसी भी तरह की टैरिफ कटौती सावधानीपूर्वक और संतुलित दृष्टिकोण से ही की जा सकती है। भारत इन क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए वार्ता कर रहा है।