नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर पाकिस्तान से सटे राज्यों—जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात—में व्यापक मॉक ड्रिल करवाने जा रही है। यह अभ्यास गुरुवार को किया जाएगा, जिससे सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है: क्या यह पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश है, या फिर युद्ध की आशंका में नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की कवायद?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों ज़रूरी हुई मॉक ड्रिल?
गौरतलब है कि 6 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था। इसके तुरंत बाद 7 मई को देश के 244 जिलों में मॉक ड्रिल कराई गई, जिसमें नागरिकों को युद्ध जैसी स्थिति में व्यवहार करने की ट्रेनिंग दी गई।
अब, जबकि ऑपरेशन समाप्त हो चुका है और सीधी सैन्य टकराव की स्थिति नहीं है, केंद्र सरकार का सीमावर्ती राज्यों में फिर से मॉक ड्रिल कराना कई संकेत दे रहा है।
रणनीतिक तैयारी या साइकोलॉजिकल वारफेयर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास भारत की सैन्य और नागरिक तैयारियों का सार्वजनिक प्रदर्शन है। साथ ही यह पाकिस्तान को एक मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश भी है कि भारत हर मोर्चे पर तैयार है।
पूर्व सेनाधिकारी और सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर (रि.) अजय सिंह का कहना है, “ऐसी मॉक ड्रिल्स न केवल नागरिकों को तैयार करती हैं, बल्कि विरोधी देशों को यह दिखाती हैं कि हम सिर्फ जवाब देने में ही नहीं, बल्कि पहले से सोचकर कदम उठाने में यकीन रखते हैं।”
पाकिस्तान ने इन्हीं राज्यों को बनाया था निशाना
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ़ से कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में सबसे अधिक उकसावेभरे कदम देखे गए। ऐसे में इन राज्यों के नागरिकों को युद्ध जैसी आपात स्थितियों में कैसे सुरक्षित रखा जाए, इसकी तैयारी करना जरूरी समझा जा रहा है।
मॉक ड्रिल में क्या होता है?
मॉक ड्रिल के दौरान आमतौर पर हवाई हमले का सायरन बजाया जाता है, ब्लैकआउट कराया जाता है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का अभ्यास कराया जाता है।
भारत में आखिरी बार इतने बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान हुई थी। ऐसे में वर्तमान हालातों में इसका दोहराया जाना बताता है कि सरकार किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए गंभीर है।
निष्कर्ष
चाहे यह अभ्यास पड़ोसी देश के लिए चेतावनी हो या आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास, इतना तो तय है कि भारत अब युद्ध या तनाव की स्थिति में केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और नागरिक जागरूकता के मोर्चे पर भी सक्रिय नजर आ रहा है।