ओटावा/लंदन, 27 मई 2025 – ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय इन दिनों कनाडा के ऐतिहासिक दौरे पर हैं। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी से मुलाकात की है, जो अपने डोनाल्ड ट्रंप विरोधी रुख के चलते कनाडा की जनता के बीच लोकप्रिय हुए।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और कनाडा के संबंधों में तल्खी देखी जा रही है और कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने जैसी धमकियां ट्रंप समर्थकों की ओर से सामने आ चुकी हैं।
क्यों खास है यह मुलाकात?
मार्च 2025 में हुए चुनावों में मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी की जीत के साथ सत्ता संभाली। चुनावी कैंपेन के दौरान उनका ट्रंप विरोधी रुख चर्चा में रहा। उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है जो कनाडा की स्वतंत्र विदेश नीति और अमेरिका से दूरी बनाए रखने की बात करता है।
ऐसे में ब्रिटिश सम्राट किंग चार्ल्स की ओर से कार्नी से व्यक्तिगत मुलाकात और सार्वजनिक स्वागत इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन, कनाडा की वर्तमान सरकार के साथ राजनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है।
किंग चार्ल्स का संदेश – एकता और परंपरा की बात
कार्नी द्वारा जारी वीडियो में किंग चार्ल्स और रानी कैमिला को कनाडा की राजधानी ओटावा में लोगों का अभिवादन करते हुए देखा गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा:
“किंग का दौरा हमारे देश की संवैधानिक परंपरा, संप्रभुता और पहचान को दर्शाता है। यह इंग्लिश, फ्रेंच और इंडिजिनस (स्थानीय) समुदायों की एकता का प्रतीक है। हम अमेरिका से अलग अपनी स्वतंत्र सोच के साथ खड़े हैं।”
क्या यह अमेरिका को संकेत है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं बल्कि कूटनीतिक संकेतों से भरा हुआ है। कनाडा अमेरिका को दिखाना चाहता है कि वह ब्रिटिश परंपरा और अपनी बहु-सांस्कृतिक पहचान को ट्रंप की कट्टर राष्ट्रवादी सोच से दूर रखना चाहता है।
निष्कर्ष:
किंग चार्ल्स की यह यात्रा कनाडा की जनता और नई सरकार को एक संवैधानिक समर्थन देने के रूप में देखी जा रही है। साथ ही यह अमेरिका और ब्रिटेन दोनों के लिए एक राजनीतिक संदेश है — कि कनाडा अपनी राह खुद तय करेगा, चाहे अमेरिका की सियासत कैसी भी हो।