मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान एक बड़ी चुनौती से जूझ रहा है। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में ईरान फिलहाल असमर्थ दिखाई दे रहा है। वजह है जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगें, जिन्हें खुद ईरान भी पूरी तरह चिन्हित और हटाने में सक्षम नहीं है।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के सहयोग के बिना भी होर्मुज को खोलने की कार्रवाई कर सकता है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत के बाद—जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़ी घटनाएं भी शामिल हैं—ईरान ने छोटी नावों के जरिए जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाईं। हालांकि अब इन सुरंगों की सटीक लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री धाराओं के कारण ये सुरंगें अपनी जगह बदल सकती हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
इस संकट का असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। जहाजों की आवाजाही में कमी आई है, जिससे तेल आपूर्ति और व्यापार प्रभावित होने की आशंका है।
इसी बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष बातचीत के बजाय इस्लामाबाद में मध्यस्थता के जरिए वार्ता की तैयारी की जा रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पहले शहबाज शरीफ से अलग-अलग मुलाकात करेंगे, जिसके बाद अप्रत्यक्ष बातचीत शुरू होने की संभावना है।
ईरान की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि यदि वार्ता संतुलित दृष्टिकोण के साथ होती है तो समझौते की संभावना बन सकती है, अन्यथा टकराव और तेज हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का यह संकट केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में कूटनीति और सैन्य रणनीति दोनों इस स्थिति की दिशा तय करेंगे।
