विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने काफी हद तक दूर कर दिया है, जिससे अब राज्य में शांति और विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने यह बातें अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात के दौरान कहीं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की जानकारी दी। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास को उपयोगी बताते हुए राज्य में हुए सकारात्मक बदलावों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा और समृद्ध लोक संस्कृति का अद्वितीय संगम है। राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है। उन्होंने बताया कि कोयले से लेकर हीरे तक यहां प्रचुर खनिज संसाधन उपलब्ध हैं और प्रदेश वर्तमान में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य बन चुका है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में निवेश और विकास की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू की गई है, जिसके तहत प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। महिला सशक्तिकरण के तहत ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है, वहीं 5.30 लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
अध्ययन दल में शामिल विदेशी अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीतियों के कारण जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।
अध्ययन दल ने अपने प्रवास के दौरान नया रायपुर की आधुनिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया, साथ ही कांकेर स्थित जंगल वारफेयर कॉलेज, कृषि विज्ञान केंद्र, बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव के शिल्पग्राम तथा भिलाई स्थित स्टील प्लांट का भी भ्रमण किया।
उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वें कार्यक्रम के तहत 120 सैन्य एवं गैर-सैन्य अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें से 15 सदस्यीय दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ दौरे पर आया है।
