रायपुर, विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, वनीकरण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर अरण्य भवन, नया रायपुर स्थित दण्डकारण्य सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में वैज्ञानिक तकनीक, वनों के महत्व और सतत भविष्य के लिए उनके प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन प्रकृति पर आधारित है और राज्य में वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने वन क्षेत्र में वृद्धि, वन्यजीवों की संख्या में बढ़ोतरी और राज्य की पहली रामसर साइट जैसी उपलब्धियों की सराहना की। साथ ही योजनाओं को लक्ष्य आधारित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में टीईआरआई, नई दिल्ली द्वारा वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन, जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने की। उन्होंने वनों के संरक्षण को सरकार के साथ-साथ समाज की जिम्मेदारी बताते हुए “न काटें, न कटने दें” का संदेश दिया।
अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने कहा कि वनों को स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका से जोड़ते हुए जैव विविधता संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जुड़े वित्तीय संसाधनों जैसे ग्रीन क्लाइमेट फंड और अन्य योजनाओं के तहत परियोजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में तकनीकी सत्र और पैनल चर्चा का भी आयोजन हुआ। तकनीकी सत्र में वनों से मिलने वाली पारिस्थितिकी सेवाओं, ग्रीन क्लाइमेट फंड परियोजनाओं और नाबार्ड द्वारा उपलब्ध वित्तीय सहायता पर जानकारी दी गई। पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने वानिकी और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर विचार साझा किए। वहीं, राष्ट्रीय अनुकूलन कोष परियोजना से जुड़े हितग्राहियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएँ” है, जिसका उद्देश्य वनों के आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करना है। यह कार्यशाला राज्य में वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
