भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लेह हिंसा के सिलसिले में कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर कांग्रेस के विरोध को पाखंड करार दिया। दुबे ने कहा कि कांग्रेस अपने लोकतंत्र के दावों पर सवालों के घेरे में है, क्योंकि आपातकाल (1975) में इंदिरा गांधी सरकार ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया और स्वतंत्रता सेनानी व पूर्व राज्यपाल भीम सेन सच्चर जैसी वरिष्ठ हस्तियों को अमानवीय रूप से गिरफ्तार किया था। उन्होंने इस कार्रवाई को कांग्रेस की महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र के दावों के खिलाफ बताया।
भाजपा सांसद ने वांगचुक के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देकर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा की। दुबे ने कहा, “कांग्रेस पिछले 30 वर्षों में कुछ नहीं कर पाई, लेकिन मोदी सरकार ने लद्दाख के लोगों की मांग पूरी की। आज वही कांग्रेस लेह हिंसा के बाद गिरफ्तार लोगों के लिए ‘मगरमच्छ के आँसू’ बहा रही है।”
उन्होंने कहा कि 82 वर्षीय भीम सेन सच्चर को सिर्फ़ एक पत्र लिखने के लिए पुलिस ने जेल में बंद किया था। दुबे ने इसे कांग्रेस की दोहरी नीति और लोकतंत्र के प्रति असम्मान के रूप में बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को देश और नागरिकों से माफी मांगनी चाहिए।
इस बयान के माध्यम से निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के वादों और उनकी ऐतिहासिक कार्रवाइयों के बीच अंतर उजागर किया और वर्तमान राजनीतिक विवाद में पार्टी की आलोचना की।
