कांगड़ा । पहाड़ों की गोद में बसे ब्रजेश्वरी माता मंदिर को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र धाम का निर्माण महाभारत काल में पांडव द्वारा कराया गया था। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मक्खन प्रसाद का अद्भुत रहस्य
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा है यहां चढ़ाया जाने वाला मक्खन प्रसाद। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था, तो उनके शरीर पर चोटें आई थीं। उन घावों को शांत करने के लिए मां ने अपने शरीर पर मक्खन लगाया था। इसी परंपरा की याद में मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिर में माता की पिंडी को मक्खन से ढका जाता है।
कुछ दिनों बाद इस मक्खन को हटाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि यह मक्खन चर्म रोगों में लाभकारी होता है और इसे खाने के बजाय शरीर पर लगाने की परंपरा है।
51 शक्तिपीठों में शामिल
ब्रजेश्वरी माता मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर में मां पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं और यहां का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर होता है।
कहां स्थित है मंदिर
यह मंदिर कांगड़ा शहर में स्थित है और धर्मशाला से लगभग 18–20 किलोमीटर की दूरी पर है। पहाड़ी इलाके में स्थित होने के कारण यहां का प्राकृतिक वातावरण बेहद सुंदर और सुकून भरा है।
कैसे पहुंचे
- हवाई मार्ग: नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल (कांगड़ा) है, जहां से मंदिर लगभग 15 किमी दूर है।
- रेल मार्ग: नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन पठानकोट है, जहां से बस या टैक्सी द्वारा कांगड़ा पहुंचा जा सकता है।
- सड़क मार्ग: दिल्ली, चंडीगढ़ और धर्मशाला से नियमित बस सेवा उपलब्ध है। निजी वाहन से यात्रा भी सुविधाजनक है।
यह शक्तिपीठ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और पौराणिक इतिहास के कारण भी श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है।
