छत्तीसगढ़ शासन समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। दिव्यांगजनों के सामाजिक पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और मुख्यधारा में सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन रही है।
समाज कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में संचालित यह योजना दिव्यांग दम्पत्तियों को विवाह के बाद आर्थिक संबल प्रदान कर उनके दाम्पत्य जीवन को सुदृढ़ आधार देती है और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
जिला गरियाबंद के छुरा विकासखंड, ग्राम कुटेना (पोस्ट पाण्डुका) निवासी कुलेश्वरी निषाद (45% अस्थिबाधित) और उनके पति लकेश निषाद (40% श्रवण बाधित) को योजना के तहत लाभ मिला। पति-पत्नी दोनों के दिव्यांग होने की स्थिति में प्रावधान अनुसार उन्हें 1 लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस सहायता से दम्पत्ति आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हुए।
गरियाबंद जिले के ही विकासखंड मैनपुर, ग्राम भाठीगढ़ निवासी 30 वर्षीय विजेश्वरी कोमर्रा (65% अस्थिबाधित) और तहसील छुरा, ग्राम अमलोर निवासी 35 वर्षीय केशर कोमर्रा को भी योजना के तहत 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत हुई। इस सहयोग ने उनके दाम्पत्य जीवन को सुदृढ़ आधार प्रदान किया।
इसी प्रकार, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के ग्राम मिरगी निवासी टिकेश्वर साहू को भी योजना का लाभ मिला। अस्थिबाधित दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने कौशल के आधार पर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। योजना के अंतर्गत 50 हजार रुपये की सहायता डीबीटी के माध्यम से उनके संयुक्त खाते में प्रदान की गई, जिससे उन्होंने टेंट और साउंड सिस्टम का व्यवसाय प्रारंभ किया।
योजना के प्रावधान अनुसार 18 से 45 वर्ष की दिव्यांग महिला और 21 से 45 वर्ष के दिव्यांग पुरुष (जो आयकरदाता न हों) को विवाह के बाद आर्थिक सहायता दी जाती है। दम्पत्ति में एक व्यक्ति दिव्यांग होने पर 50 हजार रुपये तथा दोनों दिव्यांग होने पर 1 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रावधान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक इस योजना से 631 से अधिक हितग्राही लाभान्वित हो चुके हैं।
यह योजना समावेशी और जनकल्याणकारी नीति का उदाहरण है, जो दिव्यांग दम्पत्तियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
