टेक्नोलॉजी की दुनिया में स्टीव जॉब्स सिर्फ एक सीईओ नहीं, बल्कि डिजाइन और सोच के प्रतीक माने जाते हैं। Apple को दुनिया की सबसे बड़ी और प्रभावशाली टेक कंपनी बनाने के पीछे उनका विजन, जिद और परफेक्शन के प्रति जुनून सबसे बड़ा कारण था। Apple के पहले iPod से जुड़ा एक किस्सा आज भी टेक इंडस्ट्री में मिसाल के तौर पर सुनाया जाता है।
यह घटना उस समय की है जब Apple का पहला iPod तैयार किया जा रहा था। जॉब्स चाहते थे कि iPod बेहद पतला, कॉम्पैक्ट और मिनिमलिस्ट हो। इंजीनियर्स ने पूरी मेहनत के बाद एक प्रोटोटाइप तैयार किया, लेकिन जॉब्स उसे देखकर संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने साफ कहा—इसे और पतला बनाया जाए।
इंजीनियर्स ने जवाब दिया कि यह संभव नहीं है। उनका कहना था कि डिवाइस को जितना पतला बनाया जा सकता था, वे बना चुके हैं। ‘नामुमकिन’ शब्द सुनते ही जॉब्स ने कुछ ऐसा किया, जो आज भी दफ्तरों में लीडरशिप के उदाहरण के रूप में बताया जाता है।
जॉब्स पास रखे एक मछलीघर (अक्वेरियम) के पास गए और iPod के उस प्रोटोटाइप को सीधे पानी में डाल दिया। जैसे ही डिवाइस पानी में डूबा, उसमें से हवा के छोटे-छोटे बुलबुले ऊपर उठने लगे। जॉब्स ने इंजीनियर्स की ओर इशारा करते हुए कहा—“ये बुलबुले बता रहे हैं कि डिवाइस के अंदर अभी भी खाली जगह है। यानी इसे और पतला बनाया जा सकता है।”
यह दृश्य इंजीनियर्स के लिए किसी सबक से कम नहीं था। वे समझ गए कि जॉब्स के लिए ‘नामुमकिन’ कोई तकनीकी सीमा नहीं, बल्कि सोच की सीमा है। इसके बाद टीम ने डिवाइस के अंदर की अनावश्यक जगह को कम करने पर काम किया और अंततः दुनिया को मिला Apple का पहला iPod—एक ऐसा प्रोडक्ट जिसने म्यूजिक इंडस्ट्री की दिशा बदल दी।
यह किस्सा आज भी Apple की डिजाइन फिलॉसफी ‘नो एयर स्पेस’ का प्रतीक माना जाता है। दशकों बाद भी यही सोच Apple के आधुनिक प्रोडक्ट्स में दिखाई देती है, जहां हर मिलीमीटर जगह का उपयोग बेहद सोच-समझकर किया जाता है।
स्टीव जॉब्स का यह अनोखा तरीका बताता है कि महान प्रोडक्ट सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं, बल्कि असंभव को चुनौती देने वाली सोच से बनते हैं।
