नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में रोज नए चमत्कार देखने को मिल रहे हैं। अब Meta (फेसबुक की पेरेंट कंपनी) एक ऐसी तकनीक पर काम कर रही है जिसे Meta Brain Typing कहा जा रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें आपको कुछ भी टाइप करने की जरूरत नहीं होगी—सिर्फ सोचने से ही शब्द स्क्रीन पर उतर जाएंगे।
क्या है Meta Brain Typing?
Meta Brain Typing असल में एक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक है। इसके जरिए इंसानी दिमाग के संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर में टेक्स्ट लिखा जा सकता है। यानी जो आप सोच रहे हैं, वही स्क्रीन पर खुद-ब-खुद टाइप हो जाएगा।
कैसे करता है काम?
Meta की यह तकनीक न्यूरल नेटवर्क और AI की मदद से दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को डिकोड करती है। एक खास तरह का हेडसेट या ब्रेन-सेंसिंग डिवाइस पहना जाता है, जो ब्रेन सिग्नल को पकड़कर उसे कंप्यूटर लैंग्वेज में बदल देता है। फिर AI मॉडल उस विचार को शब्दों में बदल देता है।
किनके लिए है फायदेमंद?
यह तकनीक खासकर उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है जो किसी शारीरिक अक्षमता के चलते बोल या टाइप नहीं कर सकते। इसके अलावा यह भविष्य में टाइपिंग की स्पीड और एरर को भी काफी हद तक कम कर सकता है।
क्या है भविष्य?
Meta का कहना है कि अभी यह तकनीक रिसर्च स्टेज में है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह आम लोगों की पहुंच में हो सकती है। जैसे-जैसे ब्रेन-सेंसिंग डिवाइसेज छोटे और सस्ते होंगे, वैसे-वैसे इसका इस्तेमाल भी बढ़ेगा।