स्मार्टफोन यूजर्स को स्पैम और अनजान कॉल्स से राहत देने वाला ट्रूकॉलर लंबे समय तक लोगों की जरूरत बना रहा, लेकिन अब भारत में सरकार और टेलीकॉम कंपनियों की नई पहल CNAP (Calling Name Presentation) ने कॉलिंग सिस्टम के नियम ही बदल दिए हैं। इस नई व्यवस्था के बाद ट्रूकॉलर जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स की उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
ट्रूकॉलर: एक समस्या से शुरू हुआ ग्लोबल ब्रांड
ट्रूकॉलर की शुरुआत वर्ष 2009 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में हुई थी। रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ने वाले दो छात्रों—एलन ममेदी और नामी जारिंगलम—ने अनजान कॉल्स की समस्या से परेशान होकर इस प्लेटफॉर्म की नींव रखी। शुरुआत में यह सेवा ब्लैकबेरी फोन तक सीमित थी, लेकिन एंड्रॉयड और आईफोन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ट्रूकॉलर तेजी से लोकप्रिय होता गया और एक ग्लोबल टेक कंपनी बन गया।
भारत बना ट्रूकॉलर की सफलता की रीढ़
भारत में 2014 के बाद स्पैम और प्रमोशनल कॉल्स में तेजी से बढ़ोतरी हुई। ऐसे में ट्रूकॉलर की क्राउडसोर्सिंग रणनीति ने इसे आम यूजर्स के बीच भरोसेमंद बना दिया। यूजर्स द्वारा स्पैम कॉल्स रिपोर्ट किए जाने से इसका डेटाबेस लगातार मजबूत होता गया।
आज भारत ट्रूकॉलर का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 25 करोड़ से अधिक यूजर्स इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय बाजार के महत्व को देखते हुए कंपनी ने 2018 से भारत का डेटा देश में ही स्टोर करना शुरू किया। नवंबर 2024 में कंपनी की कमान भारतीय मूल के ऋषित झुनझुनवाला को सौंपी गई।
CNAP क्या है और क्यों अहम है
अब ट्रूकॉलर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है CNAP सिस्टम। यह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की पहल है, जिसे जियो, एयरटेल और वीआई जैसी टेलीकॉम कंपनियां लागू कर रही हैं।
CNAP के तहत कॉल आने पर कॉलर का नाम सीधे टेलीकॉम नेटवर्क के जरिए मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा। यह जानकारी KYC दस्तावेजों पर आधारित होगी। इसके लिए किसी अलग ऐप को डाउनलोड करने या कॉन्टैक्ट एक्सेस जैसी अनुमति देने की जरूरत नहीं होगी।
प्राइवेसी और भरोसे पर फोकस
CNAP की सबसे बड़ी खासियत इसकी विश्वसनीयता और गोपनीयता मानी जा रही है। नेटवर्क-आधारित जानकारी होने से फर्जी या गलत पहचान की संभावना कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि CNAP के पूरी तरह लागू होने के बाद यूजर्स की ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स पर निर्भरता घट सकती है।
इसका सीधा असर ट्रूकॉलर के विज्ञापन आधारित राजस्व और प्रीमियम सब्सक्रिप्शन मॉडल पर पड़ सकता है।
ट्रूकॉलर के सामने नई चुनौती
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रूकॉलर अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसे खुद को नए सिरे से ढालना होगा। केवल कॉलर आईडी तक सीमित रहना भविष्य में पर्याप्त नहीं हो सकता।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंपनी को AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, डिजिटल सुरक्षा और बिजनेस कम्युनिकेशन टूल्स जैसे क्षेत्रों पर ध्यान बढ़ाना होगा। फिलहाल CNAP को लेकर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा बदलाव
CNAP भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यदि यह सिस्टम आम यूजर्स के लिए प्रभावी साबित होता है, तो ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स की भूमिका सीमित हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि बदलते तकनीकी दौर में ट्रूकॉलर खुद को कितनी तेजी से नया रूप दे पाता है, क्योंकि टेक की दुनिया में वही टिकता है जो समय के साथ बदलता है।
