नई दिल्ली। Marylebone Cricket Club (MCC) ने 2026 के लिए टेस्ट क्रिकेट और अन्य फॉर्मेट के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। अब टेस्ट मैच में दिन का आखिरी ओवर तब भी पूरा होगा जब उस ओवर में कोई विकेट गिरता है। इसके अलावा, एडल्ट रिक्रिएशनल क्रिकेट में लैमिनेटेड बैट का इस्तेमाल भी अब कानूनी हो गया है। ये नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।
टेस्ट क्रिकेट का नया नियम
एमसीसी ने कानून 12.5.2 में संशोधन किया है। अब अगर दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरता है, तो खेल वहीं नहीं रुकेगा। नया बल्लेबाज तुरंत मैदान में आएगा और ओवर की बची हुई गेंदें खेली जाएंगी। MCC के अनुसार, यह बदलाव फील्डिंग टीम को मैच में दबाव बनाने और खेल को रोमांचक बनाने में मदद करेगा।
महिला और जूनियर क्रिकेट में गेंद का नया मानक
एमसीसी ने महिला और अंडर-13 क्रिकेट में गेंद के वजन और आकार में बदलाव किया है। अब महिला क्रिकेट की गेंद का वजन 140-149 ग्राम और आकार 21.5-22 सेंटीमीटर होगा। जूनियर क्रिकेट (Under-13) में गेंद का वजन 140-144 ग्राम और साइज 20.5-21 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।
लैमिनेटेड बैट का ओपन-एज इस्तेमाल
अब लैमिनेटेड बैट (Type D) का इस्तेमाल एडल्ट रिक्रिएशनल क्रिकेट में भी किया जा सकेगा। इन बैट्स में पारंपरिक इंग्लिश विलो की जगह सस्ते विलो या अन्य लकड़ी का उपयोग हो सकता है। MCC ने कहा कि इससे खिलाड़ियों को महंगे बैट पर निर्भरता कम होगी और खेल अधिक सुलभ होगा।
हिट विकेट, ओवरथ्रो और डेड बॉल में बदलाव
हिट विकेट नियम में स्पष्टता लाई गई है। अब बल्लेबाज तब हिट विकेट आउट होगा जब बैट सीधे स्टंप्स से टकराए। ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। रन आउट और स्टंपिंग में भी गेंद पूरी तरह से फील्डर या विकेटकीपर के हाथ में होना अनिवार्य है।
अन्य प्रमुख बदलाव
- लिंग-आधारित शब्दों को हटा दिया गया और गैर-अंग्रेजी भाषियों के लिए स्पष्ट भाषा का उपयोग किया गया।
- मल्टी-डे मैच में आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर ओवर पूरा करना अनिवार्य होगा।
- “बनी हॉप” बाउंड्री कैच पर प्रतिबंध और विकेटकीपर की रन-अप स्थिति में बदलाव।
- कप्तान अब अंतिम पारी घोषित करने के लिए संशोधित शब्दों का पालन करेंगे।
फायदा और प्रभाव
इन बदलावों से खिलाड़ियों और क्लबों पर वित्तीय दबाव कम होगा, इंग्लिश विलो की बढ़ती कीमतों का असर घटेगा और क्रिकेट अधिक आधुनिक और संतुलित बनेगा। MCC का यह कदम खेल को सभी स्तरों पर उपयुक्त बनाने और सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
