नीदरलैंड्स के वाइक आन ज़ी में चल रहे प्रतिष्ठित टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा के लिए साल 2026 की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। पिछले वर्ष इसी टूर्नामेंट का खिताब जीतकर शानदार फॉर्म का संकेत देने वाले प्रज्ञानानंदा इस बार शुरुआती दौर में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।
टूर्नामेंट के पहले तीन राउंड में प्रज्ञानानंदा को दो हार और एक ड्रॉ से संतोष करना पड़ा है। शुरुआती मुकाबलों में उन्हें अर्जुन एरिगैसी और उज्बेकिस्तान के नोदिरबेक अब्दुसत्तोरोव के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जबकि तीसरे राउंड में वह चेक गणराज्य के थाई दाई वान गुयेन के खिलाफ ड्रॉ खेल सके। खास बात यह रही कि गुयेन की रेटिंग प्रज्ञानानंदा से 100 अंकों से अधिक कम है।
इन नतीजों के बाद तीन राउंड के पश्चात प्रज्ञानानंदा के खाते में सिर्फ 0.5 अंक हैं और वह 14 खिलाड़ियों की तालिका में निचले पायदान पर हैं। उनके साथ पूर्व विजेता अनिश गिरी भी समान अंकों के साथ मौजूद हैं।
दो महीने से थोड़ा अधिक समय बाद होने वाले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट को देखते हुए यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय मानी जा रही है। हालांकि भारतीय टीम के कोच और ग्रैंडमास्टर श्रीनाथ नारायणन ने इन नतीजों को लेकर संयम बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि कैंडिडेट्स अभी दूर है और इस तरह की हारें खिलाड़ियों को अपनी तैयारी और रणनीति सुधारने का अवसर भी देती हैं।
भारतीय खिलाड़ियों के अन्य प्रदर्शन की बात करें तो मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश की शुरुआत भी साधारण रही है। उन्होंने अब तक खेले गए तीनों मुकाबले ड्रॉ किए हैं, जिनमें अर्जुन एरिगैसी के खिलाफ मुकाबला भी शामिल है। पहले राउंड में जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ जीत की स्थिति से ड्रॉ पर रुक जाना उनके लिए निराशाजनक रहा।
इसके उलट, अर्जुन एरिगैसी शानदार लय में दिखाई दे रहे हैं। तीन राउंड के बाद वह 2 अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं और अब तक अपराजित हैं।
मास्टर्स वर्ग में खेल रहे चौथे भारतीय अरविंद चितंबरम ने भी अपने तीनों मुकाबले ड्रॉ खेलकर बिना हार के टूर्नामेंट में बने हुए हैं।
चैलेंजर्स वर्ग में वेदांत पनेसर ने जीत के साथ शुरुआत की, लेकिन अगले दो राउंड में उन्हें हार झेलनी पड़ी।
कोच श्रीनाथ नारायणन का मानना है कि प्रज्ञानानंदा के हालिया प्रदर्शन के पीछे लगातार टूर्नामेंट खेलने से आई मानसिक और शारीरिक थकान भी एक अहम कारण हो सकती है। खुद प्रज्ञानानंदा हाल ही में यह स्वीकार कर चुके हैं कि 2025 में उन्होंने बहुत कम समय घर पर बिताया और लगातार अलग-अलग देशों में मुकाबले खेले।
गौरतलब है कि वाइक आन ज़ी टूर्नामेंट को शतरंज कैलेंडर का सबसे कठिन टूर्नामेंट माना जाता है, जहां 13 राउंड लंबी और कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। प्रज्ञानानंदा के सामने अभी 11 मुकाबले बाकी हैं और समर्थकों को उम्मीद है कि पिछले साल की तरह इस बार भी टूर्नामेंट के आगे के चरणों में किस्मत और फॉर्म उनका साथ दे सकती है।
