भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर सिर्फ एक आधुनिक नगरी नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ा एक ऐसा शहर है जो पर्यटकों को अनूठा अनुभव देता है। ‘मंदिरों का शहर’ के नाम से प्रसिद्ध यह स्थान प्राचीन मंदिरों, बौद्ध-जैन विरासतों और प्राकृतिक सुंदरता का अद्वितीय संगम है।
प्राचीन मंदिरों की धरती
भुवनेश्वर की पहचान इसके भव्य मंदिरों से है। यहां स्थित लिंगराज मंदिर 11वीं शताब्दी में निर्मित एक अद्भुत वास्तुशिल्प उदाहरण है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इसके अलावा राजारानी मंदिर, मुक्तेश्वर मंदिर, और परशुरामेश्वर मंदिर जैसे मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि स्थापत्य की दृष्टि से भी दर्शनीय हैं।
उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं
तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं भुवनेश्वर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल हैं। ये जैन गुफाएं अपने शिल्पकला और इतिहास के लिए जानी जाती हैं, और आज भी इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती हैं।
प्राकृतिक और आधुनिक आकर्षण
शहर की खूबसूरती सिर्फ प्राचीन स्थलों तक सीमित नहीं है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क देश के प्रमुख चिड़ियाघरों में से एक है, जहां सफेद बाघों से लेकर दुर्लभ वनस्पतियां देखी जा सकती हैं। वहीं एकाम्र वन जैसे प्राकृतिक स्थल ध्यान और शांति के लिए आदर्श हैं। ओडिशा स्टेट म्यूज़ियम और त्रिभुवन आर्ट गैलरी जैसे स्थल संस्कृति और कला के प्रेमियों को भी लुभाते हैं।
पर्यटन को मिल रहा नया आयाम
ओडिशा सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की जा रही पहल, जैसे हेरिटेज वॉक, साइकल टूर और डिजिटल गाइडिंग सिस्टम से भुवनेश्वर तेजी से एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी इज़ाफा देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
इतिहास, संस्कृति, अध्यात्म और प्रकृति की खोज में निकले पर्यटकों के लिए भुवनेश्वर एक आदर्श गंतव्य बन चुका है। यहां हर मोड़ पर अतीत की कहानियाँ बसी हैं, जो आज भी जीवंत लगती हैं।