रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने वाला तीजा-पोरा तिहार नारी शक्ति, कृषि संस्कृति और पशुपालन के प्रति कृतज्ञता का अनूठा संगम है। यह लोकपर्व छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों में उमंग, उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तीजा-पोरा दो प्रमुख त्योहारों तीजा और पोरा (पोला) का संयुक्त उत्सव है, जो सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक है। इस लेख में जानें तीजा-पोरा की तारीख, परंपराएं, धार्मिक महत्व और आधुनिक स्वरूप।
तीजा-पोरा तिहार 2025 की तारीख
2025 में छत्तीसगढ़ में पोरा (पोला) तिहार 23 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जबकि तीजा इसके तीन दिन बाद, यानी 26 अगस्त, मंगलवार को आयोजित होगी। ये तारीखें पंचांग और स्थानीय परंपराओं के आधार पर निर्धारित की गई हैं। अपने क्षेत्र की तारीखों की पुष्टि के लिए स्थानीय जानकारी अवश्य जांच लें।
तीजा तिहार: नारी शक्ति और भक्ति का प्रतीक
तीजा मां पार्वती के कठिन तप और भगवान शिव को पति के रूप में पाने की पौराणिक कथा से जुड़ा है। यह पर्व विवाहित और अविवाहित महिलाओं द्वारा अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए मनाया जाता है।
तीजा की प्रमुख परंपराएं
- व्रत और पूजा: महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की मूर्तियों की पूजा करती हैं। कथा-श्रवण और भजन-कीर्तन इस दिन का अभिन्न हिस्सा हैं।
- पारंपरिक परिधान: महिलाएं सुहाग के प्रतीक गहनों, साड़ियों और मेहंदी से सजती हैं।
- करु भात: तीजा की पूर्व संध्या पर करेले और चावल से बना विशेष भोजन खाया जाता है।
- सिंघारा: मायके से भेजे गए उपहार, मिठाइयां, कपड़े और फल तीजा की परंपरा का हिस्सा हैं।
- लोकगीत और झूला: समूह में कजरी गीत, लोकनृत्य और झूला झूलने की रस्म वातावरण को उल्लासमय बनाती है।
- व्रत का पारण: ठेठरी, खुर्मी, पूड़ी, खीर और फलों के साथ व्रत खोला जाता है।
पोरा (पोला) तिहार: कृषि और पशुधन की पूजा
पोरा तिहार छत्तीसगढ़ के किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व पशुधन, विशेषकर बैल और गायों, के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो कृषि कार्यों की रीढ़ हैं।

पोरा की परंपराएं
- पशुओं की सजावट: बैलों और गायों को स्नान कराकर रंग-बिरंगे गहनों, घंटियों और मालाओं से सजाया जाता है। उनके सींगों पर रंग और तेल लगाया जाता है।
- कृषि यंत्रों की पूजा: किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं।
- बैल दौड़ और मेले: गांवों में बैल दौड़, झांकियां और मेलों का आयोजन होता है।
- बच्चों का उत्साह: बच्चे मिट्टी के बैल (पोरा) और खिलौनों के साथ खेलते हैं।
- पारंपरिक व्यंजन: ठेठरी, खुर्मी, फरा, खीर और अन्य मिठाइयां घर-घर बनाई जाती हैं।
तीजा-पोरा की सांस्कृतिक झलक
तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। इस दौरान:
- लोकगीत और नृत्य: महिलाएं और बच्चियां तीजा गीत, कजरी और हास्य गीत गाती हैं। समूह में नृत्य और झूला झूलना उत्सव को और रंगीन बनाता है।
- मेले और आयोजन: गांवों में पेंटा, झूले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- बच्चों की मस्ती: मिट्टी के खिलौनों और रंग-बिरंगे सजावटी सामानों के प्रति बच्चों का उत्साह देखते बनता है।
तैयारियां और उत्साह
पर्व से पहले छत्तीसगढ़ के बाजारों में रौनक छा जाती है। लोग पूजा सामग्री, पारंपरिक वस्त्र, मिठाइयां और सजावटी सामान खरीदते हैं। घरों और आंगनों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट की जाती है। महिला मंडलियां इस पर्व को खास बनाने के लिए विशेष उत्साह दिखाती हैं।

धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-विधि
- तीजा पूजा: किशोरियों से लेकर वृद्ध महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। मिट्टी या पत्तों से बनी शिव-पार्वती या गौरा-गौरी की मूर्तियों की स्थापना की जाती है। रंगोली, फूलों और दीपों से सजा मंडप पूजा का केंद्र होता है।
- पोरा पूजा: सुबह पशुओं को स्नान कराकर सजाया जाता है। कृषि यंत्रों की पूजा और सामूहिक भोज का आयोजन होता है।
- सामूहिक उत्सव: रात में भजन-कीर्तन, कथा-श्रवण और सामूहिक गीतों से उत्सव का माहौल बनता है।
प्रमुख व्यंजन

तीजा-पोरा के अवसर पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की बहार होती है:
- ठेठरी-खुर्मी: पारंपरिक व्यंजन जो हर घर में बनाए जाते हैं।
- फरा, खीर, पूड़ी: विशेष पकवान जो उत्सव का हिस्सा हैं।
- करु भात: करेले और चावल की खास थाली।
- फल और मिठाइयां: केला, नारियल, अंगूर और अन्य फल भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं।
आधुनिक स्वरूप
आज के डिजिटल युग में भी तीजा-पोरा का उत्साह कम नहीं हुआ है। शहरी छत्तीसगढ़ में:
- सामाजिक संस्थाएं और महिला मंच इस पर्व को भव्यता से आयोजित करते हैं।
- सोशल मीडिया पर तीजा-पोरा की शुभकामनाएं, तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाते हैं।
- राज्य सरकार कई क्षेत्रों में अवकाश, सांस्कृतिक आयोजन और उपहार वितरण का प्रबंध करती है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक और कृषि परंपराओं को जीवित रखता है, बल्कि समुदाय को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और शहरी संस्कृति को एक मंच पर लाता है, जहां परंपराएं और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।