Shiva Temples : भारत एक आध्यात्मिक भूमि है, जहां हर दिशा में देवताओं की उपस्थिति महसूस होती है। इन्हीं दिव्य स्थलों में एक अद्भुत रहस्य है ‘शिवशक्ति रेखा’ एक ऐसी काल्पनिक सीधी रेखा, जिस पर भगवान शिव के सात पवित्र मंदिर स्थित हैं। यह रेखा न केवल ज्योतिर्लिंगों की भौगोलिक कड़ी को जोड़ती है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना की गहराइयों को भी दर्शाती है। कहा जाता है कि इन मंदिरों की स्थापना लगभग 4000 साल पहले हुई थी और सभी मंदिर पांच तत्वों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के प्रतीक माने जाते हैं।

इस रहस्यमयी रेखा का मध्य बिंदु है मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, जिसे भारत का सेंट्रल मेरिडियन कहा जाता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत शिवशक्ति रेखा पर स्थित सात प्रमुख मंदिरों के बारे में:
1. केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड)
बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ मंदिर, शिवशक्ति रेखा की उत्तरी छोर पर स्थित है। महाभारत काल में पांडवों द्वारा निर्मित और बाद में आदि शंकराचार्य द्वारा पुनःस्थापित यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह मंदिर 6 महीने बर्फ में ढका रहता है और कपाट खुलने से बंद होने तक यहां अखंड दीप प्रज्वलित रहता है।

2. श्रीकालहस्ती मंदिर (आंध्रप्रदेश)
चित्तूर जिले में स्थित यह मंदिर वायु तत्व का प्रतीक है और राहू-केतु दोष शांति के लिए प्रसिद्ध है। यहां के शिवलिंग को न स्पर्श किया जाता है और यह मंदिर तीन जीवों — मकड़ी (श्री), सर्प (काल) और हाथी (हस्ती) के नाम पर प्रसिद्ध है।

3. एकाम्बरेश्वर मंदिर (कांचीपुरम, तमिलनाडु)
पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता यह मंदिर पल्लव राजाओं द्वारा बनवाया गया था। हर साल मार्च-अप्रैल में सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं, जो इसकी स्थापत्य कला की वैज्ञानिकता और आध्यात्मिक ऊर्जा दोनों को दर्शाती है।

4. अरुणाचलेश्वर मंदिर (तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु)
यह मंदिर अग्नि तत्व का प्रतीक है। चोल वंश द्वारा निर्मित यह मंदिर एक पौराणिक घटना से जुड़ा है जब शिव ने ब्रह्मांड के अंधकार को अग्नि स्तंभ के रूप में दूर किया था। यह आज भी ‘दीपम महोत्सव’ के दौरान हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

5. श्री थिल्लई नटराज मंदिर (चिदंबरम, तमिलनाडु)
आकाश तत्व को दर्शाने वाला यह मंदिर शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित है। यहां शिव आभूषणों से सुशोभित मुद्रा में विराजमान हैं यह दृश्य भारत के किसी अन्य मंदिर में देखने को नहीं मिलता।

6. जम्बुकेश्वर मंदिर (तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु)
जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता यह मंदिर लगभग 1800 साल पुराना है। कहा जाता है कि यहां शिवलिंग के नीचे से जलधारा बहती रहती है। माता पार्वती ने यहां तपस्या कर शिव से ज्ञान प्राप्त किया था।

7. रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु)
रामनाथस्वामी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर चार धामों में एक है। समुद्र के किनारे स्थित यह मंदिर समुद्री ऊर्जा और भक्ति की त्रिवेणी है। इसका उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है।

शिवशक्ति रेखा केवल एक भौगोलिक संयोग नहीं, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक गहराई, स्थापत्य सौंदर्य और पंचतत्वीय दर्शन का अद्भुत संगम है। इन मंदिरों की सीधी रेखा में स्थित होना केवल एक भूगोलिक रहस्य नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का अद्वितीय उदाहरण है, जो हमें यह याद दिलाता है कि शिव सृष्टि के मूल में हैं और उनके बिना कोई कार्य पूर्ण नहीं होता।