सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इस पावन महीने में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा को शुभ और फलदायक माना गया है। लेकिन शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में बेलपत्र अर्पण को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो पूजा का फल अधूरा रह जाता है।
क्या होना चाहिए बेलपत्र का स्वरूप?
भगवान शिव को चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र हमेशा त्रिदल होना चाहिए, यानी उसकी एक ही डंडी से तीन पत्ते जुड़े होने चाहिए। यह त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश – के प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही यह शिव के त्रिनेत्र और त्रिशूल का भी संकेत माना गया है।
कैसा न हो बेलपत्र?
सूखा, पीला, मुरझाया, या कीड़ों से खराब हुआ बेलपत्र शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। गिरे हुए पत्ते या गंदे पत्ते भी पूजा में निषिद्ध माने गए हैं। बेलपत्र जितना ताजा, हरा और स्वच्छ होगा, उतना ही वह भगवान शिव को प्रिय होगा।
डंडी की दिशा का रखें ध्यान
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान रखें कि उसकी डंडी शिवलिंग की ओर न हो। यह नियम शास्त्रों में विशेष रूप से बताया गया है।
लिखा या फटा बेलपत्र न करें अर्पित
यदि किसी बेलपत्र पर कुछ लिखा हो या वह कटा-फटा हो, तो उसे पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसे बेलपत्र पूजा को निष्फल बना सकते हैं।
पूजा में शुद्धता का रखें ध्यान
शास्त्रों में कहा गया है कि बेलपत्र अगर शुद्ध और नियमों के अनुरूप अर्पित किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
इस सावन, शिवभक्ति के साथ पूजा में नियमों का पालन कर आप भी भगवान शिव की कृपा पा सकते हैं।