Rath Saptami Arghya: दक्षिण भारत में रथ सप्तमी केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और स्वास्थ्य का संगम माना जाता है। 25 जनवरी 2026 को मनाए जाने वाले इस पर्व पर सूर्य देव की पूजा से सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की जाती है। रथ सप्तमी, जिसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है, माघ शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है और यह सूर्य देव के उत्तरायण और उनके रथ के सात घोड़ों द्वारा चलने के दिन के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसे फसल, आरोग्य और नई शुरुआत का पर्व भी माना जाता है।
दक्षिण भारत में रथ सप्तमी मनाने के प्रमुख कारण
1. उत्तरायण का प्रतीक:
इस दिन सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ को दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की दिशा में मोड़ते हैं। यह शीत ऋतु के अंत और फसल कटाई के मौसम का संकेत माना जाता है।
2. आरोग्य दिवस:
रथ सप्तमी को आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोग दूर होते हैं।
3. विशेष स्नान की परंपरा:
दक्षिण भारत में श्रद्धालु अर्क (पौधे) के पत्तों को सिर और कंधों पर रखकर स्नान करते हैं। इसे शारीरिक शुद्धि और रोगमुक्ति के लिए शुभ माना जाता है।
4. प्रमुख सूर्य मंदिर:
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित अरसावल्ली सूर्य नारायण स्वामी मंदिर इस पर्व को भव्य रूप से मनाता है और इसे राज्य उत्सव का दर्जा प्राप्त है।
5. सांस्कृतिक और कृषि महत्व:
रथ सप्तमी पोंगल के बाद आने वाला मुख्य पर्व है। यह किसानों के लिए नई समृद्धि और भरपूर फसल का प्रतीक है।
रथ सप्तमी का आध्यात्मिक लाभ
इस दिन सूर्य देव की पूजा और ध्यान से आत्मिक शुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। श्रद्धालु मानते हैं कि जप, ध्यान और दान करने से पाप नष्ट होते हैं और ज्ञान, आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सूर्य उपासना से जीवन में उन्नति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है।
