नई दिल्ली। गणेशोत्सव का नाम आते ही सबसे पहले मोदक याद आता है, जिसे गणपति बप्पा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोदक के अलावा भी कई पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनके बिना यह त्योहार अधूरा सा लगता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में गणेश चतुर्थी पर बप्पा को विविध पकवानों का भोग चढ़ाने की परंपरा है। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि त्योहार की रौनक और भी बढ़ा देते हैं।

आइए जानते हैं ऐसे 8 खास पकवानों के बारे में —
1. शंकरपाली
मैदा, चीनी और घी से तैयार यह कुरकुरी डिश महाराष्ट्र और गुजरात में खूब पसंद की जाती है। इसे सुनहरा तलकर बनाया जाता है और प्रसाद के रूप में हर उम्र के लोग चाव से खाते हैं।
2. पुरण पोली
महाराष्ट्र की यह पारंपरिक मीठी रोटी चने की दाल और गुड़ से बनाई जाती है। मोदक के बाद इसे गणेशोत्सव का सबसे प्रिय पकवान माना जाता है। घी के साथ परोसी जाने वाली यह डिश त्योहार के स्वाद को दोगुना कर देती है।
3. लड्डू
गणेश चतुर्थी पर बेसन, रवा और नारियल से बने लड्डू का विशेष महत्व है। इन्हें बनाना आसान और स्वाद लाजवाब होता है।
4. मेथी भाजी
कई जगहों पर गणपति को हरी सब्जियों का भोग भी लगाया जाता है। मसालों में बनी मेथी भाजी एक सात्विक प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है।
5. श्रीखंड
दही से बनने वाली यह मिठाई गुजरात और महाराष्ट्र दोनों जगह बेहद लोकप्रिय है। इसमें केसर, इलायची और सूखे मेवे मिलाए जाते हैं। श्रीखंड को गणपति भोग में खास तौर पर शामिल किया जाता है।
6. खिचड़ी
मूंग दाल और चावल से बनी सात्विक खिचड़ी कई स्थानों पर गणेशोत्सव के दौरान प्रसाद में परोसी जाती है।
7. नारियल बर्फी
गणेश चतुर्थी में नारियल का विशेष महत्व है। नारियल से बनी बर्फी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि इसे तैयार करना भी आसान है।
8. पोंगल
दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में, पोंगल गणपति भोग का अहम हिस्सा है। इसे मीठा और नमकीन दोनों तरीकों से बनाया जाता है।

इस तरह गणेशोत्सव का उत्सव केवल मोदक तक सीमित नहीं है, बल्कि इन पारंपरिक पकवानों के बिना बप्पा का भोग अधूरा माना जाता है। हर राज्य की यह विविध परंपरा न केवल स्वाद बढ़ाती है बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि को भी दर्शाती है।