देऊर मंदिर छत्तीसगढ़ के गंडई नगर में स्थित है और इसे एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व का मंदिर माना जाता है। यह मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है और इसके निर्माण से संबंधित किंवदंतियां एवं ऐतिहासिक तथ्य इसे खास बनाते हैं।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
निर्माण काल: देऊर मंदिर का निर्माण लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। यह मंदिर कलचुरी वंश के शासनकाल से संबंधित है, जो उस समय छत्तीसगढ़ के प्रमुख शासक थे।
शैली: मंदिर नागर शैली की वास्तुकला में निर्मित है, जिसमें मूर्तियों और शिल्पकला की बारीकी देखने को मिलती है।
धार्मिक महत्व: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे “देऊर” कहा जाता है, जो छत्तीसगढ़ी में “मंदिर” का पर्यायवाची है।
2. स्थापत्य कला:
मुख्य गर्भगृह: गर्भगृह में भगवान शिवलिंग स्थापित है, जिसे श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
मूर्ति शिल्प: मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, गंधर्वों, अप्सराओं, और लोक कथाओं से जुड़ी मूर्तियां उकेरी गई हैं।
अद्वितीयता: मंदिर के स्तंभों और छत पर की गई नक्काशी अत्यंत सुंदर और बारीक है, जो उस समय की उच्च कला और शिल्प कौशल को दर्शाती है।
3. पुरातात्विक महत्व:
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है।
यहां कई प्राचीन अवशेष और शिलालेख भी मिले हैं, जो उस समय के सामाजिक और धार्मिक जीवन के बारे में जानकारी देते हैं।
4. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
देऊर मंदिर गंडई के स्थानीय त्योहारों और धार्मिक आयोजनों का केंद्र है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है।
स्थानीय लोग इस मंदिर को चमत्कारी मानते हैं और इसे गंडई क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल मानते हैं।
5. आसपास के दर्शनीय स्थल:
गंडई के आसपास कई और ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक स्थल हैं, जैसे कि माँ गंगई, घटियारी मंदिर, डोमेश्वर महादेव
कैसे पहुंचे:
सड़क मार्ग: गंडई छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के पास स्थित है और यह रायपुर और राजनांदगांव से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन: राजनांदगांव रेलवे स्टेशन, जो गंडई से करीब 72 किलोमीटर दूर है।
निकटतम हवाई अड्डा: स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर।
देऊर मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।