भद्राचलम: दक्षिण भारत की अयोध्या
भद्राचलम, तेलंगाना राज्य के भद्राद्री कोठागुडम जिले में स्थित है। इसे “दक्षिण भारत की अयोध्या” कहा जाता है क्योंकि यह भगवान श्रीराम का प्रमुख धार्मिक स्थल है। भद्राचलम का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
स्थान का धार्मिक महत्व
- सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर
- भद्राचलम में स्थित यह मंदिर भगवान राम और देवी सीता को समर्पित है।
- इसे भक्त भद्र ने स्थापित किया था, जिनके नाम पर इस स्थान का नाम पड़ा।
- मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र का दौरा किया था।
- गोदावरी नदी का महत्व
- यह मंदिर गोदावरी नदी के किनारे स्थित है, जिसे पवित्र माना जाता है।
- भक्त यहां स्नान कर अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक ऋषि भद्र ने भगवान विष्णु की तपस्या की और उनसे वरदान मांगा कि वे उनके दर्शन दें। भगवान विष्णु ने रामावतार में भद्र के सामने प्रकट होकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया।
इतिहास
- भद्राचलम का मंदिर 17वीं शताब्दी में रामदासु (भक्त कंचरला गोपालकृष्ण) द्वारा पुनर्निर्मित किया गया।
- रामदासु ने निज़ाम के अधीन रहते हुए राजकोष से धन का उपयोग करके मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
- बाद में, भगवान राम की कृपा से उनकी मुक्ति हुई।
त्योहार और उत्सव
- रामनवमी
- यह सबसे प्रमुख त्योहार है, जिसमें भगवान राम और सीता का विवाह समारोह आयोजित किया जाता है।
- वैष्णव कार्तिका मासम
- इस महीने में बड़ी संख्या में भक्त गोदावरी नदी के किनारे पूजा-अर्चना करते हैं।
पर्यटन आकर्षण
- पर्णशाला
- यह वह स्थान है जहां माना जाता है कि राम, सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान समय बिताया था।
- गोदावरी नदी क्रूज
- भक्त और पर्यटक गोदावरी नदी में नाव की सवारी का आनंद लेते हैं।
भद्राचलम कैसे पहुंचें
- सड़क मार्ग:
- हैदराबाद और अन्य प्रमुख शहरों से बसें उपलब्ध हैं।
- रेल मार्ग:
- भद्राचलम रेलवे स्टेशन (कोठागुडम) से कनेक्टिविटी है।
- हवाई मार्ग:
- निकटतम हवाई अड्डा राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद है।
भद्राचलम, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम है। यह स्थान भक्तों के लिए न केवल धार्मिक यात्रा का केंद्र है, बल्कि इसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रतीक माना जाता है।