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राजिम लोचन मंदिर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम नगर में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इसे प्रदेश का “प्रयाग” भी कहा जाता है, क्योंकि यह मंदिर महानदी, पैरी और सोंढुर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर स्थित है।
निर्माण और इतिहास
- मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में माना जाता है।
- इसकी वास्तुकला और पत्थर की नक्काशी से यह स्पष्ट होता है कि यह शैव–वैष्णव–शाक्त परंपराओं के प्रभाव वाला स्थल है।
- कई इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण नागवंश या सोमवंश के शासकों द्वारा कराया गया माना जाता है।
वास्तुकला की खासियत
राजिम लोचन मंदिर अपनी अद्भुत प्राचीन कला के लिए प्रसिद्ध है।
विशेषताएँ:
- मंदिर का मुख्य गर्भगृह 12 विशाल पत्थर के स्तंभों पर आधारित है।
- स्तंभों और दीवारों पर हिंदू पौराणिक कथाओं, विभिन्न देवताओं और अवतारों की आकर्षक नक्काशी की गई है।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा “लोचन” कहलाती है, जिसमें दिव्य नेत्रों का विशेष महत्व है।
धार्मिक महत्व
- त्रिवेणी संगम के कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
- यहां प्रतिवर्ष राजिम कुंभ मेला (राजिम मघी पुन्नी मेला) का भव्य आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
- यह स्थान वैष्णव, शैव और संत परंपरा सभी के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ है।
राजिम कुंभ (माघी पुन्नी मेला)

- हर साल माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होता है।
- संत, अखाड़े, नागा साधु, कलश यात्राएं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
- इसे छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कुंभ कहा जाता है।
कैसे पहुंचें?
- राजिम, रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है।
- रायपुर से सड़क मार्ग द्वारा बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- निकटतम हवाई अड्डा: स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर
- निकटतम रेलवे स्टेशन: रायपुर/महासमुंद
आसपास के प्रमुख दर्शनीय स्थल
- कूप मंदिर
- राजीव लोचन घाट
- रामचंद्र मंदिर
- कोटेश्वर महादेव मंदिर (संगम के बीच टापू पर)
- छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध राजिम कुंभ स्थल
