कबीरधाम जिले में स्थित ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण केंद्र बना हुआ है। 7वीं से 11वीं शताब्दी के दौरान कलचुरी शासकों द्वारा निर्मित यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी अद्भुत कलाकृतियों और खजुराहो शैली की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। पत्थरों पर उकेरी गईं उत्कृष्ट मूर्तियाँ और मंदिर की अनोखी संरचना हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

मंदिर परिसर में इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। हर वर्ष आयोजित होने वाला भोरमदेव महोत्सव भी जल्द ही होने वाला है, जिसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं।
ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का संगम भोरमदेव मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अग्रणी बना हुआ है।
