रायपुर तिल्दा । ग्राम पंचायत मढ़ी में स्थित गौरी गणेश स्पंज आयरन प्लांट के खिलाफ शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन प्रदेश कांग्रेस कमिटी (ओबीसी विभाग) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भावेश बघेल के नेतृत्व में किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्लांट लंबे समय से पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी प्रदूषण फैल रहा है और आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है।
मढ़ी सहित आसपास के कई पंचायतों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गौरी गणेश स्पंज आयरन प्लांट द्वारा पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से 24 घंटे काला जहरीला धुआं निकल रहा है, जो क्षेत्र के खेतों, जल स्रोतों, तालाबों और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।
उन्होंने बताया कि, प्लांट के पास स्थित स्कूल के छात्रों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। ग्रामीणों को यह भी शिकायत है कि प्लांट से जुड़े भारी वाहन कोदवा-जांजगीरा बस्ती मार्ग से अत्यधिक गति से गुजरते हैं, जिससे पहले भी कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट प्रबंधन को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के चलते लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और वे बड़ी संख्या में एकजुट होकर प्लांट का घेराव करने पहुंचे।
भावेश बघेल ने बताया कि इस मामले में कलेक्टर, जिला रायपुर को ज्ञापन सौंपा गया है और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन से फ़ोन पर बात कर शिकायत दर्ज करवाई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते विधानसभा सत्र में विधायक अनुज शर्मा द्वारा इस मुद्दे को सदन में उठाया गया था, विशेषकर प्लांट के पास स्थित स्कूल की दुर्दशा को लेकर, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार पर तंज और आंदोलन की चेतावनी
भावेश बघेल ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “जब आमजन सांस नहीं ले पा रहे, तब सरकार ‘सुशासन तिहार’ मनाने में व्यस्त है। यह कैसा सुशासन है, जहाँ लोगों की जिंदगी खतरे में डाली जा रही है?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्लांट पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण और उग्र आंदोलन करेंगे।
ग्रामीणों की यह एकजुटता दर्शाती है कि अब वे केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने हक और जीवन के अधिकार के लिए सड़क पर उतरने को तैयार हैं।