छत्तीसगढ़ में नौकरी बचाने के लिए अनोखा प्रदर्शन: हवन, मुंडन, और इच्छा मृत्यु की मांग
छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा अपनी नौकरी बचाने के लिए अनोखे प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। ये प्रदर्शन उनकी नौकरी को नियमित करने और रोजगार सुरक्षा की मांगों को लेकर हो रहे हैं। हाल ही में, प्रदर्शनकारियों ने हवन, मुंडन, और इच्छा मृत्यु की मांग जैसे अनोखे तरीकों से सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
प्रदर्शन का कारण
- राज्य सरकार द्वारा संविदा कर्मचारियों को नियमित न करने की नीति।
- अस्थायी कर्मचारियों की नौकरी में सुरक्षा और भविष्य की गारंटी का अभाव।
- लंबे समय से कर्मचारियों की मांगों को अनसुना करना।
प्रदर्शन के अनोखे तरीके
- हवन और पूजा-पाठ:
प्रदर्शनकारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए देवी-देवताओं की शरण ली। हवन और पूजा के माध्यम से उन्होंने सरकार से अपनी मांगों को स्वीकार करने की अपील की। - मुंडन (सिर मुंडवाना):
कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध में अपना सिर मुंडवाकर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। यह तरीका उनके विरोध का एक प्रतीकात्मक रूप है। - इच्छा मृत्यु की मांग:
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि अगर उनकी नौकरी नहीं बचाई गई, तो वे अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पाएंगे और जीने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
- सरकार ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण वार्ता करने की अपील की है।
- कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने की बात कही गई है।
- हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और उनका कहना है कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, प्रदर्शन जारी रहेगा।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक और श्रम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन राज्य में श्रम सुधार और कर्मचारियों की बेहतरी के लिए चेतावनी का संकेत हैं। यह मुद्दा चुनावी माहौल में भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में हो रहे ये अनोखे प्रदर्शन सरकार और समाज दोनों के लिए विचारणीय हैं। ये न केवल कर्मचारियों के अधिकारों और रोजगार सुरक्षा की आवश्यकता को उजागर करते हैं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक नीतियों पर भी सवाल खड़े करते हैं।