Aarang: आरंग। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के लिए गर्व का क्षण है। आरंग विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बहनाकाड़ी से जुड़े जागृति पंथी दल को भारत सरकार ने 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया है। राष्ट्रीय पंथी नर्तक वेद प्रकाश माहेश्वरी के नेतृत्व में यह दल देश की राजधानी में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंथी नृत्य कला को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करेगा।
यह पंथी नृत्य गुरु घासीदास जी की शिक्षाओं और सतनामी समाज की परंपराओं से प्रेरित है, जिसे देश-विदेश में पहचान दिलाने का यह एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले इस भव्य आयोजन में देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी रहेगी। इसके अलावा यूरोपीय संघ की शीर्ष नेता, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
35 सदस्यीय टीम देगी सांस्कृतिक संदेश
पंथी नर्तक वेद प्रकाश माहेश्वरी ने बताया कि उनकी 35 सदस्यीय टीम पंथी नृत्य और गीतों के माध्यम से देश की सामाजिक परिस्थितियों, वीर जवानों के शौर्य और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को दर्शाएगी। साथ ही बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा। यह टीम देशभर से आए करीब 5000 कलाकारों के साथ 22 दिनों तक परेड ग्राउंड में रिहर्सल कर अपनी प्रस्तुति देगी।
7 जनवरी को दिल्ली के लिए रवाना होगी टीम
जागृति पंथी दल 7 जनवरी को रायपुर रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के लिए रवाना होगा। इस आमंत्रण के लिए वेद प्रकाश माहेश्वरी और उनकी टीम ने दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक और अधिकारियों के प्रति आभार जताया है। टीम में सुरेंद्र, गिरधारी, संजय, हेमंत, चंद्रशेखर, योगेश, सूरज, तुषार, रामकुमार, धर्मेंद्र, हितेश, मनमोहन, राहुल, भुनेश्वर, मोना, अमन, समीर, गोकुल, संतोष, डायमंड लहरिया सहित कई कलाकार शामिल हैं।
क्षेत्र में खुशी का माहौल
इस उपलब्धि पर ग्राम बहनाकाड़ी और आसपास के क्षेत्र में खुशी की लहर है। जागृति पंथी दल 1996 के स्वर्ण पदक विजेता डॉ. सी.एल. रात्रे, सरपंच अशोक बंजारे, समाज के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और युवा नेताओं ने टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने इसे छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंथी नृत्य के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है।
