सोंदूर जलाशय में नौका विहार बंद होने को लेकर हाल ही में प्रकाशित समाचारों के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था किसी भी प्रकार की प्रशासनिक उदासीनता के कारण नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न आपसी मतभेदों के चलते अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि इस विषय में किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं।
पर्यटन संवर्धन की महत्वपूर्ण पहल
सोंदूर जलाशय में नौका विहार की शुरुआत सितंबर 2022 में क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने तथा स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस पहल से बेलरबाहरा, बरपदर और मेचका की वन प्रबंधन समितियों को लगभग 1.5 से 2 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई, जिसका उपयोग पर्यटक सुविधाओं के विकास, नौका चालकों के मानदेय और संचालन व्यवस्था में किया गया।
वन विभाग द्वारा पैडल बोट एवं चप्पू नाव जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित और आकर्षक अनुभव मिल रहा था।
प्रवेश शुल्क व्यवस्था
पर्यटक स्थल पर केवल बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए ₹10 प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया था। इस राशि का उपयोग बैरियर प्रभार, साफ-सफाई और व्यवस्थागत कर्मियों के मानदेय के लिए किया जाना था। यह शुल्क स्थानीय ग्रामीणों पर लागू नहीं था। हालांकि, आपसी असहमति के चलते शुल्क वसूली बाधित हुई, जिससे नौका विहार संचालन पर असर पड़ा।
अस्थायी अवरोध के कारण
प्रशासन के अनुसार, स्थानीय आपसी विवादों के कारण कुछ नौकाओं को क्षति पहुंची, जिससे शासकीय संपत्ति को नुकसान हुआ और गतिविधि प्रभावित हुई। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि स्थानीय समन्वय की कमी का परिणाम है।
प्रशासनिक पहल और आगे की योजना
वर्तमान में वन विभाग द्वारा संबंधित ग्रामीणों और वन प्रबंधन समितियों के साथ संवाद और समन्वय की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक समितियों से सहमति लेकर आवश्यक शर्तों एवं सुव्यवस्थित संचालन व्यवस्था के साथ नौका विहार को पुनः प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
जिला प्रशासन और वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपसी समन्वय स्थापित होते ही सोंदूर जलाशय में नौका विहार को फिर से सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी पुनः सृजित होंगे।
