नई दिल्ली। देशभर में यूपीआई (UPI) सिस्टम में लगातार तकनीकी समस्याओं और आउटेज की घटनाओं ने आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना कराया है। इन समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं और व्यापारियों को वित्तीय असुविधाएं हो रही हैं। इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें यूपीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर की मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
1 अरब ट्रांजैक्शन प्रतिदिन का लक्ष्य
बैठक में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अगले 2-3 वर्षों में यूपीआई सिस्टम के जरिए प्रतिदिन 1 अरब ट्रांजैक्शन तक पहुंचना है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि यूपीआई संचालन में आ रही सभी बाधाओं को जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और यूजर बेस में वृद्धि
NPCI (National Payments Corporation of India) के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 से लेकर 2024-25 तक यूपीआई से 26 करोड़ नए यूजर्स और 5.5 करोड़ व्यापारी जुड़ चुके हैं। इसके साथ ही, सरकार और NPCI ने रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है, जिससे किसी भी संभावित रुकावट का तुरंत पता चल सके और उसे समाधान किया जा सके।

नए ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता
यूपीआई बाजार में Super.Money, Navi, BHIM और CRED जैसे नए ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये ऐप्स कैशबैक, आकर्षक ऑफर्स और यूजर फ्रेंडली इंटरफेस के जरिए यूजर्स को आकर्षित कर रहे हैं। मार्च 2025 तक इन ऐप्स की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी 4% तक पहुंच गई है, जो अक्टूबर 2024 में केवल 2.3% थी।

PhonePe और Google Pay का दबदबा जारी
हालांकि, PhonePe और Google Pay अभी भी यूपीआई बाजार पर हावी हैं, और दोनों मिलकर करीब 82% बाजार हिस्सेदारी पर काबिज हैं। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इन बढ़ती प्रतिस्पर्धाओं के बावजूद यूपीआई सिस्टम में तकनीकी स्थिरता, भरोसेमंद सेवा और यूजर फ्रेंडली अनुभव बना रहे।