तियानजिन। चीन के तियानजिन में आयोजित 31वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक मंच पर नजर आना वैश्विक राजनीति में ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। यह तस्वीर सिर्फ तीन महाशक्तियों की मौजूदगी का प्रतीक नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और रणनीतिक गठजोड़ का भी संकेत देती है। खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने भारत और चीन को आपसी सहयोग और विकास साझेदारी के नए रास्तों की ओर प्रेरित किया है।
भव्य स्वागत और फोटो सत्र
SCO समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी सदस्य देशों के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान आयोजित फोटो सत्र में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस और अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। यह फोटो न केवल SCO की बढ़ती ताकत को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक कूटनीति में बहु-ध्रुवीय शक्ति की मजबूती का प्रतीक भी है।
मोदी-जिनपिंग द्विपक्षीय बैठक: नए अध्याय की शुरुआत
समिट से अलग, पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच लगभग एक घंटे तक द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक में सीमा पर शांति, व्यापार सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुई पिछली मुलाकात के बाद से आए सकारात्मक बदलावों का स्वागत किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन के रिश्तों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए और कहा, “हमारी रणनीतिक स्वायत्तता हमें परिभाषित करती है। भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं।”
सीमा पर शांति और व्यापार में सहयोग
बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया गया। 2020 की गलवान झड़प के बाद तनावग्रस्त रहे संबंधों में हाल के डिसएंगेजमेंट समझौतों से सुधार हुआ है। दोनों नेताओं ने न्यायसंगत और स्वीकार्य समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा, व्यापार घाटा कम करने, निवेश बढ़ाने, सीधी उड़ानें शुरू करने, वीजा सुविधाओं को आसान करने और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली पर भी सहमति बनी।
अमेरिकी टैरिफ पर भारत का कड़ा रुख
SCO समिट इस वजह से भी महत्वपूर्ण बना क्योंकि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 50% टैरिफ लगाने की योजना बनाई थी। ट्रंप ने दावा किया था कि भारत सस्ते रूसी तेल से लाभ उठा रहा है। भारत ने इसका विरोध करते हुए कहा कि तेल खरीद वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखना है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, “हम अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देंगे और रूस से तेल खरीदना जारी रखेंगे।”
वैश्विक मंच पर भारत-चीन-रूस की ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट ने वैश्विक व्यवस्था में बहु-ध्रुवीय शक्ति संतुलन को मजबूती दी है। भारत, चीन और रूस की यह एकजुटता ट्रंप की नीतियों और वैश्विक दबावों को चुनौती दे सकती है। हालांकि, कुछ कोर मुद्दे जैसे चीन का पाकिस्तान को समर्थन और सीमा विवाद अभी भी अनसुलझे हैं।
SCO: बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा
SCO समिट में भारत, चीन और रूस की एकजुटता ने वैश्विक शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करने की संभावना को मजबूत किया है। ट्रंप की अनुपस्थिति के बावजूद उनकी नीतियों ने चर्चा का केंद्र बनाया। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक स्थिरता में योगदान को रेखांकित किया। यह समिट और मोदी-जिनपिंग-पुतिन की तस्वीर न केवल कूटनीतिक उपलब्धि है, बल्कि बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ता बड़ा कदम भी है।