अंबाला। हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी यह उड़ान भारतीय वायुसेना के गौरव और सामर्थ्य का प्रतीक बनी। राष्ट्रपति के अंबाला पहुंचने पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और एयरफोर्स स्टेशन परिसर में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान लगभग 30 मिनट तक चली, जिसमें उन्होंने राफेल की तकनीकी क्षमता, ऑपरेशनल विशेषताएं और उड़ान नियंत्रण से जुड़ी अहम जानकारियां प्राप्त कीं। उड़ान के दौरान उन्होंने भारतीय वायुसेना की कार्यप्रणाली और उसके सामरिक कौशल का प्रत्यक्ष अनुभव किया। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन देश के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है, जहां राफेल विमानों का मुख्य स्क्वॉड्रन — 17वीं स्क्वॉड्रन ‘गोल्डन एरोज’ तैनात है।
यह वही स्क्वॉड्रन है जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अप्रैल 2024 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने इसी अभियान में राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था। यह मिशन भारत की सामरिक ताकत और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का प्रतीक साबित हुआ था।
इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने अप्रैल 2023 में असम के तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 एमकेआई विमान में उड़ान भरी थी। वे ऐसा करने वाली भारत की तीसरी राष्ट्रपति बनीं। उनसे पहले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (2006) और प्रतिभा पाटिल (2009) ने भी इस अनुभव को साझा किया था।
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर राष्ट्रपति के आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उपायुक्त अजय सिंह तोमर के अनुसार, एयरबेस के आसपास ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही बिना मोबाइल के प्रवेश की अनुमति दी गई।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में वायुसेना के साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता की सच्ची प्रहरी है और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि महिलाओं की भागीदारी भी सशस्त्र बलों में निरंतर बढ़े।
