भारत का राष्ट्रीय पशु: बाघ (Panthera tigris)
Contents
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है, जिसे वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस (Panthera tigris) से जाना जाता है। यह भारत की समृद्ध जैव विविधता और शक्ति का प्रतीक है। बाघ को 1973 में “प्रोजेक्ट टाइगर” के तहत राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया, ताकि इसे विलुप्त होने से बचाया जा सके।
बाघ के बारे में मुख्य तथ्य
- प्रजाति:
बाघों की सबसे आम प्रजाति रॉयल बंगाल टाइगर है, जो भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में पाई जाती है। - भौगोलिक क्षेत्र:
भारत में बाघ आमतौर पर घने जंगलों, घास के मैदानों और मैंग्रोव वन क्षेत्रों (जैसे सुंदरबन) में पाए जाते हैं। - भौतिक विशेषताएँ:
- लंबाई: 8-10 फीट (पूंछ सहित)।
- वजन: 140-300 किलोग्राम।
- रंग: पीले-नारंगी फर पर काले धारियां।
- आंखें: बाघ की आंखें रात में भी देखने में सक्षम होती हैं।
- जीवन चक्र:
- औसत आयु: 10-15 वर्ष।
- मादा बाघिन 2-4 शावकों को जन्म देती है।
- आहार:
बाघ मांसाहारी होते हैं और हिरण, जंगली सूअर, भैंस जैसे जानवरों का शिकार करते हैं। - प्राकृतिक भूमिका:
बाघ पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे शिकारियों की संख्या को नियंत्रित करके पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं।
बाघ की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व
- सांस्कृतिक प्रतीक:
बाघ भारतीय पौराणिक कथाओं और कला में शक्ति, बहादुरी और गरिमा का प्रतीक है।
देवी दुर्गा को अक्सर बाघ पर सवार दिखाया जाता है। - राष्ट्रीय पहचान:
बाघ भारत के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। यह देश की वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को दर्शाता है।
बाघों की संरक्षण स्थिति
- वर्तमान स्थिति:
अंतरराष्ट्रीय संघ (IUCN) ने बाघ को “संकटग्रस्त प्रजाति” (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया है। - भारत में संरक्षण प्रयास:
- प्रोजेक्ट टाइगर (1973): भारत सरकार ने बाघों की घटती संख्या को रोकने के लिए यह योजना शुरू की।
- देश में 53 से अधिक बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves) स्थापित किए गए हैं।
- जनगणना (2022): भारत में बाघों की संख्या लगभग 3,167 है, जो विश्व के कुल बाघों का 75% है।
बाघ के लिए प्रमुख खतरे
- अवैध शिकार:
बाघ की खाल और अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग। - वन क्षेत्र की कमी:
वनों की कटाई और शहरीकरण से बाघों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। - मानव-पशु संघर्ष:
बाघों और मनुष्यों के बीच बढ़ती मुठभेड़।
निष्कर्ष
बाघ भारत की ताकत और धरोहर का प्रतीक है। इसके संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक को जागरूक होना चाहिए और इसके आवास की सुरक्षा के लिए योगदान देना चाहिए। बाघों की रक्षा करना न केवल हमारे पर्यावरण बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर की भी रक्षा करना है।
