भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर (Indian Peafowl) है, जिसे वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus से जाना जाता है। यह पक्षी अपनी सुंदरता, गौरव और सांस्कृतिक महत्व के कारण राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। आइए इसके बारे में पूरी जानकारी लेते हैं:
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राष्ट्रीय पक्षी का चयन
- भारत सरकार ने 1963 में मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया।
- इसके चयन का कारण इसकी सुंदरता, भारतीय संस्कृति में इसकी विशेष भूमिका और यह तथ्य था कि यह पूरे भारत में पाया जाता है।
मुख्य विशेषताएं
- रंग और संरचना:
- मोर का मुख्य रंग चमकदार नीला और हरा होता है।
- इसके पंखों पर “आंख के आकार” वाले खूबसूरत डिज़ाइन होते हैं।
- नर मोर (Peacock) का पंख लंबा और चमकदार होता है, जबकि मादा मोर (Peahen) हल्के भूरे रंग की होती है।
- आवास:
- मोर मुख्य रूप से घास के मैदानों, जंगलों, और कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है।
- यह भारत के अलावा श्रीलंका और म्यांमार में भी पाया जाता है।
- खान-पान:
- यह सर्वाहारी पक्षी है जो अनाज, कीड़े, छोटे सरीसृप, और फल खाता है।
- प्रजनन:
- प्रजनन का समय मुख्यतः बरसात के मौसम में होता है।
- मादा मोर एक बार में 3-5 अंडे देती है।
- जीवनकाल:
- मोर का औसत जीवनकाल 10-25 वर्ष होता है।
भारतीय संस्कृति में महत्व
- धार्मिक महत्व:
- मोर को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है।
- यह भगवान कार्तिकेय का वाहन और देवी सरस्वती से जुड़ा हुआ है।
- भगवान कृष्ण का मोर पंख सिर पर धारण करना उनके व्यक्तित्व का प्रतीक है।
- कला और साहित्य:
- प्राचीन भारतीय साहित्य, कविता और नृत्य में मोर का विशेष स्थान है।
- राष्ट्रीय प्रतीक:
- मोर भारतीय गौरव, सुंदरता, और नैतिकता का प्रतीक है।
मोर से जुड़े रोचक तथ्य
- बारिश के मौसम में नर मोर अपनी खूबसूरत पूंछ फैला कर नृत्य करता है।
- मोर की आवाज तेज़ और दूर तक सुनाई देती है, जिससे यह खतरे का संकेत भी देता है।
- यह पक्षी उड़ने में सक्षम है, लेकिन केवल छोटे फासले तक।
संरक्षण स्थिति
- मोर को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित किया गया है।
- हालांकि यह पक्षी भारत में आम है, लेकिन इसके शिकार और निवास स्थान की कमी से यह खतरे में आ सकता है।
निष्कर्ष
मोर न केवल भारत का राष्ट्रीय पक्षी है, बल्कि यह देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। इसे संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
