नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबित ट्रेड डील पर सहमति बनने की उम्मीदें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं। अगले हफ्ते अमेरिकी अधिकारियों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा, जो द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण वार्ता करेगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब 50% अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत के निर्यात में लगातार दूसरे महीने अक्टूबर में भी गिरावट दर्ज की गई है।
ट्रंप और भारत दोनों की ओर से सकारात्मक संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कई बार संकेत दे चुके हैं कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। वहीं भारत की ओर से भी सकारात्मक बयान आते रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सितंबर में कहा था कि वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और दोनों देश समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं।
10–12 दिसंबर को होगी अहम बैठक
ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए 10 से 12 दिसंबर तक तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। अमेरिका की ओर से इस चर्चा का नेतृत्व उप–संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि करेंगे। इस बैठक में टैरिफ कटौती सहित कई महत्वपूर्ण व्यापारिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
पहली बैठक से नहीं निकला था निष्कर्ष
इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी अधिकारी भारत आए थे, लेकिन उस दौर की वार्ताओं से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। अब यह उनका दूसरा दौरा है, जिससे इस बार ठोस प्रगति की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
दोनों देशों का सकारात्मक रुख जारी
दोनों पक्षों से लगातार अच्छे संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि “बहुत जल्द एक अच्छी डील लॉक होने वाली है।” भारत भी इस समझौते के प्रति उत्साहित दिखाई दे रहा है, खासकर मौजूदा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच।
अब तक छह दौर की बातचीत पूरी
फरवरी से शुरू हुई इस ट्रेड डील पर अब तक करीब छह दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। हालांकि अंतिम सहमति अभी नहीं बन पाई है, फिर भी दोनों देश बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मौजूदा समय में भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 191 अरब डॉलर के आसपास है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
