केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को स्पष्ट किया कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के अंतरिम ढांचे में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस समझौते में सभी प्रमुख फसलों और दुग्ध उत्पादों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, ताकि भारतीय किसानों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
सीहोर (मध्य प्रदेश) में किसानों से बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह समझौता किसानों और देश की जनता दोनों के हित में है। इससे भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार के नए द्वार खुलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय बासमती चावल और मसालों की अमेरिका में जबरदस्त मांग बनेगी।
उन्होंने कहा, “हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों के हितों से कोई समझौता न हो। सभी प्रमुख फसलें और डेयरी उत्पाद संरक्षित हैं। दूसरी ओर, किसानों को निर्यात के बड़े अवसर मिलेंगे।”
भारत और अमेरिका ने हाल ही में पारस्परिक लाभ वाले व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा की घोषणा की है। संयुक्त बयान के अनुसार, यह रूपरेखा 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुरू हुई व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) वार्ता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस समझौते में अतिरिक्त बाजार पहुंच और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाने पर भी जोर दिया गया है।
बयान में यह भी उल्लेख है कि भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क में कमी या समाप्ति करेगा। इनमें सूखे अनाज (DDG), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब एवं स्पिरिट सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस मुद्दे पर कहा कि भारत ने इस समझौते में दुग्ध उत्पादों, फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य अनाजों को संरक्षित रखते हुए घरेलू किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की है।
सरकार का कहना है कि यह समझौता भारतीय कृषि निर्यात को नई गति देगा, जबकि किसानों की सुरक्षा और हितों को पूरी मजबूती से बरकरार रखा गया है।
