हावड़ा ब्रिज भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता शहर में हुगली नदी पर बना एक ऐतिहासिक पुल है। इसे भारत के सबसे प्रसिद्ध और व्यस्त पुलों में से एक माना जाता है। यह ब्रिज कोलकाता और हावड़ा शहर को जोड़ता है।
हावड़ा ब्रिज का निर्माण
1936 में शुरू हुआ और यह 1943 में पूरा हुआ।
इसे 2 फरवरी 1943 को जनता के लिए खोला गया।
निर्माण की विशेषताएं:
इसे “कैन्टीलीवर ब्रिज” (Cantilever Bridge) के तौर पर डिजाइन किया गया।
इसकी लंबाई 705 मीटर (2,313 फीट) और चौड़ाई 71 फीट है।
इसे बनाने में करीब 26,500 टन स्टील का उपयोग हुआ, जिसमें टाटा स्टील द्वारा निर्मित स्टील का इस्तेमाल किया गया।
इसे पहले नया हावड़ा ब्रिज कहा जाता था, क्योंकि इसके स्थान पर पहले एक पेंटून पुल था।
1965 में इसका नाम बदलकर “रवींद्र सेतु” कर दिया गया, महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर के सम्मान में।
आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग
इसे ब्रिटिश फर्म रेंडेल, पामर और ट्रिटन ने डिजाइन किया था।
निर्माण का ठेका ब्रैथवेट, बर्न एंड जेसोप कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया
महत्व
यह पुल प्रतिदिन लगभग 1,00,000 वाहन और पैदल चलने वाले 1,50,000 लोगों का भार संभालता है।
इसे नदी पर पिलर्स के बिना बनाए गए सबसे बड़े पुलों में गिना जाता है।
रोचक तथ्य
इसे बनाने के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध का समय था, इसलिए सुरक्षा कारणों से स्टील का आयात नहीं किया जा सका।
आज यह कोलकाता का प्रमुख पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक धरोहर है।
निष्कर्ष
हावड़ा ब्रिज भारत की इंजीनियरिंग और औद्योगिक ताकत का प्रतीक है। यह न केवल कोलकाता का प्रमुख यातायात मार्ग है, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है जो भारत की विरासत को दर्शाता है।