बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी का त्योहार विद्या, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जो बुद्धि, संगीत, ज्ञान और विद्या की देवी मानी जाती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इसे श्री पंचमी और सरस्वती पूजन दिवस के नाम से भी जाना जाता है।
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बसंत पंचमी की मान्यता
- मां सरस्वती का प्रकटोत्सव – मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए यह दिन उनके पूजन के लिए विशेष महत्व रखता है।
- विद्या का शुभारंभ – इस दिन छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत (अक्षरारंभ) की जाती है। इसे ‘विद्यारंभ संस्कार’ कहा जाता है।
- बसंत ऋतु का स्वागत – यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल खिलते हैं, जिससे पीले रंग का विशेष महत्व होता है।
- भगवान राम से जुड़ी मान्यता – कहा जाता है कि इसी दिन भगवान राम ने माता सीता को अशोक वाटिका में पहली बार देखा था।
- कवि कालिदास की कथा – एक कथा के अनुसार, मां सरस्वती की कृपा से ही महान कवि कालिदास को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
बसंत पंचमी पूजा विधि
- स्नान और संकल्प – प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए संकल्प लें।
- मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें – माता सरस्वती की मूर्ति या चित्र को एक स्वच्छ स्थान पर रखें।
- पीले फूल और वस्त्र अर्पित करें – मां को पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी, केसर और चंदन अर्पित करें।
- पुस्तक और वाद्य यंत्रों की पूजा करें – इस दिन किताबों, पठन-पाठन सामग्री और संगीत वाद्ययंत्रों की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- सरस्वती मंत्र का जाप करें –
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें और मां सरस्वती से ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करें। - हवन और आरती करें – पूजा के बाद मां सरस्वती की आरती करें और भोग लगाएं।
- विद्यारंभ संस्कार – छोटे बच्चों को इस दिन पहली बार लिखना सिखाया जाता है।
बसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?
✔ क्या करें:
- पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दें।
- विद्यार्थियों को मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।
- मधुर वाणी बोलें और सकारात्मक सोच रखें।
✖ क्या न करें:
- इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें।
- झूठ, क्रोध और कटु वचन बोलने से बचें।
- माता सरस्वती की पूजा में अशुद्ध वस्त्र या गंदे स्थान पर पूजा न करें।
निष्कर्ष
बसंत पंचमी न केवल देवी सरस्वती की आराधना का पर्व है बल्कि यह शिक्षा, ज्ञान, संगीत और कला का उत्सव भी है। यह त्योहार नई ऊर्जा, उत्साह और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है।