Ardha Kumbh 2027 : हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके तहत लगभग 105 घाटों में एंट्री बैन और हरिद्वार-ऋषिकेश को सनातन पवित्र नगरी घोषित करने की संभावना पर भी मंथन हो रहा है।
भीड़ नियंत्रण और धार्मिक पवित्रता के उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य अर्धकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और धार्मिक पवित्रता बनाए रखना है। अधिकारियों ने बताया कि हाल के दिनों में श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने भी इस विषय में अपनी मांग सरकार के सामने रखी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिए कि हरिद्वार की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुराने कानूनों और वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है, ताकि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके।
हरिद्वार और ऋषिकेश को सनातन पवित्र नगर बनाने पर विचार
राज्य सरकार दोनों नगरों को सनातन पवित्र नगर घोषित करने पर भी मंथन कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हरिद्वार और ऋषिकेश सनातन परंपरा और आस्था के प्रमुख केंद्र हैं, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सरकार पवित्रता बनाए रखने और भीड़ प्रबंधन के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।

2027 अर्धकुंभ और घाटों का पुनर्विकास
हरिद्वार में प्रतिवर्ष लगभग पाँच करोड़ श्रद्धालु आते हैं। राज्य सरकार ने 2027 अर्धकुंभ, सावन माह की कांवड़ यात्रा और गंगा कॉरिडोर परियोजना को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में 105 घाटों का सर्वेक्षण किया गया है और उनके पुनर्निर्माण व पुनर्विकास की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
श्री गंगा सभा की मांग
श्री गंगा सभा हर की पौड़ी के अध्यक्ष पंडित नितिन गौतम ने कहा है कि कुंभ मेला क्षेत्र और प्रमुख गंगा घाटों को गैर-हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि ब्रिटिश काल में भी हरिद्वार नगर पालिका क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के ठहरने और व्यापार को लेकर नियम थे। पंडित गौतम ने कहा कि भव्य और सुरक्षित कुंभ आयोजन के लिए यह कदम आवश्यक है।
यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो हरिद्वार और ऋषिकेश को पवित्र नगरी का दर्जा दिया जा सकता है। इसके तहत घाटों पर कड़े नियम, रात्रि प्रवास और आचरण से जुड़ी नई गाइडलाइंस लागू की जाएंगी। 2027 के अर्धकुंभ से पहले इस पर अंतिम निर्णय सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
