प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की ऐतिहासिक जीत की सराहना करते हुए इसे केरल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव करार दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) द्वारा दशकों से की गई उपेक्षा का अंत और विकास व सुशासन के एक नए युग की शुरुआत है।
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एलडीएफ और यूडीएफ पर भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों मोर्चे भले ही अलग-अलग झंडे और चुनाव चिन्हों का उपयोग करते हों, लेकिन उनकी मूल राजनीतिक सोच और एजेंडा लगभग समान है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने केरल को भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और विभाजनकारी राजनीति के चक्र में धकेला है। इन्हें यह भरोसा रहा कि हर पांच साल में सत्ता में आने का मौका मिलेगा, लेकिन बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी रहीं।”
उन्होंने कहा कि दशकों तक तिरुवनंतपुरम की उपेक्षा की गई, जिससे शहर बुनियादी सुविधाओं और अवसंरचना के मामले में पीछे रह गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वामपंथी और कांग्रेस सरकारें जनता की जरूरतों को पूरा करने में असफल रहीं, जबकि भाजपा की टीम ने अब विकसित तिरुवनंतपुरम की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
नगर निगम चुनाव में भाजपा की जीत को सुशासन की जीत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एक विकसित केरल के निर्माण के संकल्प की जीत है और राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री ने केरल में भाजपा की वर्तमान स्थिति की तुलना गुजरात में पार्टी के शुरुआती दौर से की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 से पहले गुजरात में भी भाजपा एक सीमित प्रभाव वाली पार्टी थी, लेकिन अहमदाबाद नगर निगम में जीत के बाद जनता ने लगातार पार्टी पर भरोसा जताया। उसी तरह, केरल में भी भाजपा की शुरुआत अब एक शहर से हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तिरुवनंतपुरम आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक आदर्श शहर बनेगा। उन्होंने शहर के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
उन्होंने आगामी चुनावों के संदर्भ में केरल के राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की राजनीति लंबे समय से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच घूमती रही है, लेकिन अब एक तीसरा विकल्प भी मौजूद है, जो विकास और सुशासन को प्राथमिकता देता है, और उसका प्रतिनिधित्व भाजपा तथा एनडीए कर रहे हैं।
