इंटरनेट डेस्क। नेपाल में हाल ही में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। इस आंदोलन का कोई एक चेहरा या नेता नहीं है, बल्कि इसे जनरेशन Z (Gen-Z) ने नेतृत्व प्रदान किया है। महज 24 घंटे में इस पीढ़ी ने नेपाल में सत्ता परिवर्तन कर दिया, जिसने सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। लेकिन आखिर ये Gen-Z कौन हैं? उनकी उम्र क्या है, और उनकी विशेषताएं क्या हैं? आइए जानते हैं इस डिजिटल पीढ़ी के बारे में सबकुछ।
Gen-Z: कौन हैं ये युवा?
जनरेशन Z, जिसे Gen-Z कहा जाता है, उन लोगों का समूह है, जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं। यानी, 2025 तक इनकी उम्र 13 से 28 साल के बीच है। यह पीढ़ी दुनिया की कार्यशक्ति (वर्कफोर्स) का लगभग 30% हिस्सा बन चुकी है और अपनी अनूठी सोच, आदतों और टेक्नोलॉजी के प्रति लगाव के कारण समाज और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रही है। नेपाल में इस पीढ़ी ने बिना किसी औपचारिक नेतृत्व के, सोशल मीडिया के दम पर एक ऐसी क्रांति रच दी, जिसने सरकार को बदल दिया।
डिजिटल नेटिव्स: टेक्नोलॉजी का साथी
Gen-Z को डिजिटल नेटिव्स के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ये लोग जन्म से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच बड़े हुए हैं। एक शोध के अनुसार, 98% Gen-Z युवाओं के पास स्मार्टफोन है और 95% सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। ये लोग डेस्कटॉप की बजाय मोबाइल पर ज्यादा काम करते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग, वर्क-फ्रॉम-होम और डिजिटल क्रिएटिविटी इनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। नेपाल में Gen-Z ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक और वाइबर का इस्तेमाल करके हजारों लोगों को प्रदर्शन के लिए एकजुट किया।
सूचना के प्रति सजगता
Gen-Z की एक बड़ी खासियत यह है कि वे सूचना के प्रति बहुत सतर्क और आलोचनात्मक हैं। वे ऑनलाइन सामग्री को जांचते हैं और केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करते हैं। चाहे वह सामाजिक मुद्दों की बात हो या करियर की योजना, Gen-Z गहन जानकारी और विशेषज्ञ सलाह को महत्व देता है। नेपाल के प्रदर्शनों में भी इस पीढ़ी ने भ्रष्टाचार और ‘नेपो किड्स’ (नेताओं के बच्चों की शानदार जीवनशैली) के खिलाफ सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाई, जिसने आंदोलन को और तेज किया।
वित्तीय जागरूकता और साइड हसल
Gen-Z पैसे को लेकर बहुत सजग है। एक सर्वे के मुताबिक, इस पीढ़ी के दो-तिहाई लोग 19 साल की उम्र से ही बचत शुरू कर देते हैं। 2025 में 18 से 35 साल के 61% युवा वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंतित हैं। नौकरी की अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के बीच Gen-Z साइड हसल (अतिरिक्त काम) के जरिए अपनी आय बढ़ाने में विश्वास रखता है। ये लोग फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस में सक्रिय हैं, जो उनकी स्वतंत्र और रचनात्मक सोच को दर्शाता है।
खरीदारी और सोशल मीडिया का प्रभाव
Gen-Z की खरीदारी की आदतें भी उनकी डिजिटल जीवनशैली से प्रभावित हैं। 81% Gen-Z लोग सोशल मीडिया पर उत्पाद खोजते हैं, और 85% नए उत्पादों की जानकारी इन प्लेटफॉर्म्स से लेते हैं। वे ऑनलाइन रिव्यूज पर उतना ही भरोसा करते हैं जितना किसी दोस्त की सलाह पर। नेपाल में Gen-Z ने सोशल मीडिया का उपयोग न केवल जागरूकता फैलाने के लिए किया, बल्कि यह भी दिखाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उनकी आवाज को बुलंद करने का सबसे बड़ा हथियार हैं।
क्यों पड़ा Gen-Z नाम?
Gen-Z पहली ऐसी पीढ़ी है, जिसने अपने जीवन की शुरुआत से ही इंटरनेट और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया है। पिछली पीढ़ियों ने इंटरनेट के बिना और उसके साथ दोनों तरह का जीवन देखा, लेकिन Gen-Z का जन्म और विकास डिजिटल युग में हुआ। यही कारण है कि उन्हें टेक्नोलॉजी का ‘किंग’ कहा जाता है। उनकी यह खासियत नेपाल में हाल के प्रदर्शनों में साफ दिखाई दी, जहां उन्होंने VPN और अन्य डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया बैन को बायपास किया और आंदोलन को तेजी दी।
नेपाल में Gen-Z का तख्तापलट
नेपाल में सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद Gen-Z ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नेताओं के बच्चों की शानदार जीवनशैली के खिलाफ भी था। #NepoKids और #NepoBaby जैसे हैशटैग्स के जरिए Gen-Z ने लोगों को एकजुट किया और 24 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। इस आंदोलन में 13 से 28 साल के युवाओं की मुख्य भूमिका रही, जिन्होंने बिना किसी औपचारिक नेतृत्व के डिजिटल और सड़क दोनों मोर्चों पर अपनी ताकत दिखाई।
Gen-Z की यह ताकत न केवल नेपाल में, बल्कि पूरी दुनिया में एक नई क्रांति का प्रतीक बन चुकी है। उनकी डिजिटल समझ, सामाजिक जागरूकता और त्वरित कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि यह पीढ़ी भविष्य को नई दिशा देने में सक्षम है।
