South Africa China Trade Deal : नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों और भारी आयात शुल्कों (30% तक) के बाद दक्षिण अफ्रीका ने चीन के साथ एक ऐतिहासिक ट्रेड डील पर हस्ताक्षर कर अमेरिका को व्यापारिक और कूटनीतिक चुनौती दी है। यह समझौता मार्च 2026 तक फाइनल होने की संभावना है और इसे ट्रंप प्रशासन की रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी के जवाब में देखा जा रहा है।
अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में बढ़ा तनाव
ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 30% भारी ड्यूटी लगा दी थी। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका को G20 बैठक में हिस्सा लेने से रोका गया। इन कदमों के बाद दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए विकल्प तलाशना शुरू कर दिया।
चीन के साथ ‘महाडील’
6 फरवरी 2026 को दक्षिण अफ्रीका के व्यापार और उद्योग मंत्री पार्क्स टाउ ने चीन में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस डील के तहत दक्षिण अफ्रीका के कुछ प्रमुख उत्पाद जैसे फलों को चीनी बाजार में ड्यूटी-फ्री भेजा जा सकेगा। बदले में चीन को दक्षिण अफ्रीका में निवेश के बड़े अवसर मिलेंगे।
असर और क्षेत्रीय विस्तार
इस साझेदारी से कृषि, खनन, अक्षय ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती मिलेगी। चीन पहले से ही दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और यह डील पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में चीन के आर्थिक प्रभाव को और बढ़ाएगी। मंत्री पार्क्स टाउ ने कहा कि यह समझौता दोस्ती और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ हुआ है और ट्रंप प्रशासन को एक स्पष्ट संदेश देता है।
अमेरिका के साथ संबंध
दक्षिण अफ्रीका ने चीन के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली हैं, लेकिन अमेरिका के साथ अपने संबंध पूरी तरह से नहीं तोड़े हैं। अफ्रीकी अधिकारी अभी भी अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक समझौते के लिए बातचीत का विकल्प तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका की यह दोहरी रणनीति ट्रंप प्रशासन पर टैरिफ कम करने का दबाव बनाने के लिए भी प्रभावी हो सकती है।
