गाजा/तेल अवीव। मध्य पूर्व एक बार फिर खतरनाक संघर्ष की आग में जल रहा है। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक इजराइल ने गाजा पर भीषण हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 60 लोगों की जान चली गई, जिनमें 22 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इन हमलों से गाजा में भय और तबाही का माहौल है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति को लेकर गहराई से चिंतित है।
हमलों की पृष्ठभूमि: बंधक रिहाई के बाद उग्र प्रतिक्रिया
इन हमलों से एक दिन पहले हमास ने अमेरिका की मध्यस्थता के बाद एक इजरायली-अमेरिकी बंधक को रिहा किया था। माना जा रहा था कि यह कदम संघर्षविराम की दिशा में संकेत हो सकता है, लेकिन इजराइल ने इसके उलट कार्रवाई करते हुए गाजा पर जबलिया समेत कई इलाकों को निशाना बनाया।

जबलिया के इंडोनेशियाई अस्पताल ने बताया कि हमलों में दर्जनों लोगों की जान गई है और दर्जनों घायल हैं। अस्पताल में घायलों की भीड़ और लाशों का अम्बार देखने को मिला।
नेतन्याहू का कड़ा रुख: “हमास का अंत निकट”
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों के बाद अपने बयान में स्पष्ट किया कि अब युद्धविराम की कोई संभावना नहीं बची है। उन्होंने कहा,
“हमारे पास युद्ध रोकने का कोई तरीका नहीं है। हमास के खिलाफ यह लड़ाई निर्णायक चरण में है। हमारी सेनाएं बड़ी ताकत के साथ गाजा में प्रवेश करेंगी और मिशन पूरा करेंगे।”
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक और बयान में कहा गया है कि सेनाएं वादा किए गए बल वृद्धि के बेहद करीब हैं और गाजा में अब निर्णायक हमला होगा।

सेना की तैयारी: नागरिकों को खाली करने की चेतावनी
इजरायली रक्षा बल (IDF) ने हमास के संरचनात्मक ठिकानों को निशाना बनाने से पहले जबलिया और आसपास के क्षेत्रों में रिहायशी इलाकों को खाली करने की चेतावनी दी थी। बावजूद इसके, हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए, जिससे युद्ध की नैतिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
सैन्य संकट और सख्त कदम: सेवा अवधि बढ़ाई
हमास के खिलाफ चल रही लड़ाई में इजराइल को भारी सैन्य बल की जरूरत महसूस हो रही है। सैनिकों की कमी से जूझ रही सरकार ने एक एतिहासिक फैसला लिया है — अब इजराइली नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। यह फैसला सैन्य बल को स्थायी और सक्षम बनाए रखने की रणनीति के तहत लिया गया है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और तनाव
गाजा में बढ़ते हमलों और नागरिक हताहतों की संख्या पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताई है। इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले मध्य-पूर्व दौरे पर हैं और यह संघर्ष उनकी कूटनीतिक यात्राओं के बीच नई चुनौती के रूप में सामने आया है।