भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए बड़े व्यापार समझौते ने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। इस डील को जहां अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भारत के लिए गेमचेंजर बता रहे हैं, वहीं पाकिस्तान में इसे लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है। पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने आशंका जताई है कि इस समझौते का सीधा असर पाकिस्तान के निर्यात पर पड़ सकता है।
डॉ. एजाज के मुताबिक, यदि यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को मिल रही GSP+ (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस) सुविधा पर पुनर्विचार किया, तो पाकिस्तान के लिए ‘शून्य टैरिफ’ का दौर समाप्त हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तानी उत्पादों पर दोबारा टैरिफ लगने की स्थिति बन सकती है, जिससे यूरोपीय बाजार में उनकी कीमतें बढ़ जाएंगी और प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति से पाकिस्तान के करीब 9 अरब डॉलर के निर्यात और लगभग 1 करोड़ रोजगार पर जोखिम पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि पिछले एक दशक में पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में टैरिफ कम किए थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं।
डॉ. एजाज ने यह भी कहा कि भारत, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश अपनी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं, जबकि पाकिस्तान को भी अपनी निर्यात नीति और औद्योगिक रणनीति पर तत्काल पुनर्विचार करने की जरूरत है।
फिलहाल पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की GSP+ योजना का लाभ मिलता रहा है, जिसके तहत हजारों उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी शून्य रहती है। लेकिन India-EU डील के बाद इस व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका ने पाकिस्तान में व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
