स्विट्ज़रलैंड ने 1 जनवरी 2025 से सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने (जैसे बुर्का और नकाब) पर प्रतिबंध लगाने का कानून लागू किया है। इस नए नियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर अपना चेहरा ढकता है, तो उसे 1,000 स्विस फ्रैंक (लगभग 95,000 भारतीय रुपये) तक का जुर्माना भरना होगा। यह कानून स्विट्ज़रलैंड में एक जनमत संग्रह के बाद लागू किया गया था, जिसमें 51.2% नागरिकों ने चेहरा ढकने के खिलाफ मतदान किया था।
कानून के प्रमुख बिंदु:
- चेहरा ढकने पर जुर्माना: सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का, नकाब या अन्य किसी तरीके से चेहरा ढकने पर 1,000 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगेगा।
- कुछ छूट: धार्मिक आयोजनों, स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों, स्थानीय रीति-रिवाजों, थिएटर अभिनय, और मौसम से बचाव के लिए चेहरा ढकने की अनुमति दी जाएगी।
- पूर्व में लागू हुए नियम: स्विट्ज़रलैंड से पहले यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, नीदरलैंड और बुल्गारिया में भी सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लागू हो चुका है।
- विरोध और समर्थन: मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इस कानून का विरोध किया है, जबकि इसके समर्थक इसे सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी मानते हैं।
विरोध:
- मुस्लिम संगठनों का विरोध: कई मुस्लिम संगठन इस कानून को महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। उनका कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करता है और मुस्लिम महिलाओं को एक निश्चित तरीके से जीने के अधिकार से वंचित करता है।
- एमनेस्टी इंटरनेशनल का रुख: मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कानून को ‘खतरनाक’ बताया है और इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है।
समर्थन:
- सांस्कृतिक और सुरक्षा के कारण: कानून के समर्थक इसे सार्वजनिक सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी मानते हैं। वे कहते हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने से पहचान और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
अन्य यूरोपीय देशों में स्थिति:
स्विट्ज़रलैंड से पहले यूरोपीय देशों में भी इस तरह के कानून लागू किए जा चुके हैं:
- फ्रांस: 2011 में फ्रांस ने सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाया।
- ऑस्ट्रिया और बेल्जियम: इन देशों ने भी सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाया है।
- डेनमार्क और नीदरलैंड: इन देशों में भी इसी प्रकार के कानून लागू हैं।
यह कानून यूरोपीय देशों में मुसलमानों के प्रति बढ़ती सांस्कृतिक और धार्मिक बहस का हिस्सा है, जिसमें समाज की सुरक्षा और सांस्कृतिक धारा को लेकर विभाजन है।