रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत ने हाल के महीनों में एक संतुलित और रणनीतिक कदम उठाया है, जिसका असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और दबाव के बीच भारत ने बिना किसी सार्वजनिक बयानबाजी के रूस से तेल आयात में कटौती की, जिससे मॉस्को को भारतीय बाजार बनाए रखने के लिए प्रति बैरल लगभग 10 डॉलर तक का डिस्काउंट देने पर मजबूर होना पड़ा।
यूक्रेन युद्ध के बाद वर्ष 2022 से भारत रूस का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार बन गया था। हालांकि, हाल के महीनों में अमेरिका ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों पर सख्त प्रतिबंध लगाए और भारत पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत के तौर पर कुछ भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि रूस से तेल खरीद की कीमत चुकानी पड़ सकती है।
इसके जवाब में भारत ने सीधे टकराव की बजाय व्यावहारिक रास्ता चुना। पिछले दो महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय कटौती की। इसके साथ ही भारत ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख करते हुए ब्राजील से तेल खरीद बढ़ाई। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने मार्च माह के लिए ब्राजील की सरकारी कंपनी पेट्रोबस सहित अन्य सप्लायर से लगभग 70 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा।
भारत की इस रणनीति का असर रूस पर तुरंत दिखा। यूरोप पहले ही रूसी तेल से दूरी बना चुका है, अमेरिका के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं और चीन पहले से ही कीमतों को लेकर कड़ा मोलभाव कर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ग्राहक के हाथ से निकलने की आशंका ने रूस की चिंता बढ़ा दी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार रूस ने भारत को यूराल क्रूड पर करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट की पेशकश की है। यह डिस्काउंट पिछले वर्ष की तुलना में 3 से 5 डॉलर अधिक बताया जा रहा है। वर्ष 2022 के बाद पहली बार भारतीय बंदरगाहों पर इतनी बड़ी छूट दी जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति रूस की मजबूरी को दर्शाती है। प्रतिबंधों के कारण रूस के लिए डॉलर कमाने के रास्ते सीमित हो गए हैं और भारत जैसे बड़े बाजार को बनाए रखना उसके लिए आवश्यक हो गया है।
इस बीच भारत की इस संतुलित नीति का असर अमेरिका में भी देखा गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटाने पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती की है।
विश्लेषकों के अनुसार भारत अब केवल सस्ते तेल पर निर्भर रहने की नीति से आगे बढ़ चुका है। भारत की रणनीति आपूर्ति के विविधीकरण और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, जिसमें किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचना प्राथमिकता है। रूस, अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति दबाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है।
