ईरान में भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का भारत को किया गया फोन कॉल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बुधवार देर शाम अरागची ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत कर ईरान और उसके आसपास की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की।
जयशंकर ने खुद इस बातचीत की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—
“ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का फोन आया। हमने ईरान और उसके आसपास की बदलती स्थिति पर चर्चा की।”
क्यों अहम है यह फोन कॉल?
यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब ईरान के सभी 31 प्रांतों में हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं। ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद शुरू हुए ये आंदोलन अब सरकार विरोधी विद्रोह का रूप ले चुके हैं।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, इन प्रदर्शनों में अब तक 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इतने गंभीर हैं कि ईरान के आस-पास के देशों में भी सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
भारत को क्यों किया गया संपर्क?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस संकट के दौर में भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देशों से कूटनीतिक समर्थन चाहता है। भारत पश्चिम एशिया में संतुलन बनाने वाली बड़ी शक्ति माना जाता है, ऐसे में यह फोन कॉल युद्ध टालने और अंतरराष्ट्रीय दबाव कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
साथ ही ईरान में हजारों भारतीय नागरिक, छात्र और व्यापारी मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भारत ने अपने नागरिकों के लिए जारी की चेतावनी
ईरान में हालात बिगड़ते देख भारतीय दूतावास ने नया परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है—
ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक (छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक) उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों और अन्य परिवहन साधनों से देश छोड़ दें।
साथ ही भारतीयों को
- प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने
- स्थानीय मीडिया पर नजर रखने
- और भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने
की सलाह दी गई है।
क्या ईरान युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
ईरान में सरकार के खिलाफ उठी आवाज़ें अब सिस्टम बदलने की मांग में बदल चुकी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान सरकार को प्रदर्शनकारियों पर “क्रूर कार्रवाई” को लेकर चेतावनी दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़े, तो ईरान में सैन्य कार्रवाई या विदेशी हस्तक्षेप से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
ऐसे विस्फोटक माहौल में ईरानी विदेश मंत्री का भारत से संपर्क करना यह दर्शाता है कि तेहरान संकट से पहले वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश में है। भारत के लिए यह सिर्फ कूटनीतिक मामला नहीं बल्कि हजारों भारतीयों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा भी बन गया है।
ईरान की अगली चाल पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
