नई दिल्ली। जब भी हम किसी छोटी-मोटी बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं, तो अक्सर वे एक टेस्ट की सलाह देते हैं – कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट। यह एक सामान्य रक्त परीक्षण है, लेकिन यह हमारे शरीर की कई स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने में सक्षम है। सीबीसी टेस्ट क्या है, यह क्यों कराया जाता है, और इसमें शामिल RBC, WBC और हीमोग्लोबिन का क्या महत्व है? इस बारे में हमने भोपाल के एक प्रमुख अस्पताल के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रमेश शर्मा से बात की।
CBC Test क्या है
सीबीसी टेस्ट एक व्यापक रक्त परीक्षण है, जो हमारे खून में मौजूद विभिन्न घटकों जैसे लाल रक्त कोशिकाएं (RBC), सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC), हीमोग्लोबिन, और प्लेटलेट्स की मात्रा और गुणवत्ता की जांच करता है। ये सभी कोशिकाएं हमारी हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मैरो में बनती हैं। इस टेस्ट के जरिए इनके स्तर का पता चलता है, और अगर ये सामान्य से कम या ज्यादा हैं, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।
RBC (लाल रक्त कोशिकाएं): शरीर का ऑक्सीजन वाहक
डॉ. शर्मा बताते हैं कि लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। अगर RBC की संख्या कम हो जाए, तो यह एनीमिया (खून की कमी) का कारण बन सकता है, जिससे थकान, कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं, अगर RBC की संख्या जरूरत से ज्यादा हो, तो खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे रक्त के थक्के बनने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
Hemoglobin: ऑक्सीजन का परिवहन
RBC के अंदर मौजूद हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक लाकर सांस के जरिए बाहर निकालता है। हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे थकान, चक्कर, और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। सामान्य स्तर पुरुषों में 13.5-17.5 g/dL और महिलाओं में 12.0-15.5 g/dL होता है।
WBC (सफेद रक्त कोशिकाएं): शरीर के रक्षक
सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC) हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। ये वायरस, बैक्टीरिया, फंगस और अन्य संक्रमणों से लड़ने में मदद करती हैं। WBC कई प्रकार की होती हैं, जिनमें बी-सेल्स और टी-सेल्स प्रमुख हैं। बी-सेल्स एंटीबॉडी बनाकर संक्रमण को खत्म करती हैं, जबकि टी-सेल्स क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। WBC का स्तर बढ़ने पर इंफेक्शन या सूजन का संकेत हो सकता है, और कम होने पर इम्यून सिस्टम कमजोर होने की आशंका होती है।
प्लेटलेट्स: खून का थक्का बनाने वाला तत्व
प्लेटलेट्स का मुख्य काम चोट लगने पर खून का थक्का बनाकर रक्तस्राव को रोकना है। ये चोट वाली जगह पर जाकर आपस में चिपकती हैं और खून को बहने से रोकती हैं। प्लेटलेट्स की कमी से रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है, जैसा कि डेंगू जैसे रोगों में देखा जाता है। वहीं, इनका अधिक होना अनावश्यक थक्कों का कारण बन सकता है। सामान्य प्लेटलेट काउंट 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होता है।
कब और क्यों कराएं सीबीसी टेस्ट
डॉ. शर्मा के अनुसार, अगर आपको निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो सीबीसी टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है:
- बार-बार थकान या कमजोरी महसूस होना
- छोटी-मोटी चोटों का देर से ठीक होना
- लगातार बुखार या इंफेक्शन का खतरा
- असामान्य रक्तस्राव या चोट के निशान
- सांस लेने में तकलीफ या चक्कर आना
यह टेस्ट कराना बेहद आसान है। इसमें एक छोटा सा रक्त नमूना लिया जाता है, और कुछ घंटों में रिपोर्ट मिल जाती है। खास बात यह है कि इसकी रिपोर्ट को गैर-चिकित्सक भी आसानी से समझ सकते हैं। हालांकि, डॉ. शर्मा सलाह देते हैं कि बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी उपचार शुरू न करें।
सीबीसी टेस्ट का महत्व
सीबीसी टेस्ट न केवल एनीमिया, इंफेक्शन, या रक्तस्राव से जुड़ी समस्याओं का पता लगाता है, बल्कि यह ल्यूकेमिया, कैंसर, और अन्य गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत भी दे सकता है। यह टेस्ट नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।