अक्सर देखा जाता है कि कई लोगों का ब्लड प्रेशर (BP) सामान्य रहता है, लेकिन दिल की धड़कन यानी पल्स रेट तेज हो जाती है। सामान्य वयस्कों में पल्स रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट मानी जाती है। यदि पल्स रेट 100 से अधिक हो जाए, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
भारी कसरत या तेज गति से चलने के बाद दिल की धड़कन बढ़ना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी शारीरिक मेहनत के बार-बार ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे कई स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं।
थायराइड और हीमोग्लोबिन की कमी
शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने पर हार्टबीट तेज हो सकती है। वहीं हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिसकी भरपाई के लिए दिल को तेजी से काम करना पड़ता है, इससे पल्स रेट बढ़ जाती है।
तनाव और चिंता भी बन सकते हैं कारण
लंबे समय तक मानसिक तनाव, चिंता या काम का अत्यधिक दबाव शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ा देता है। इसका सीधा असर दिल पर पड़ता है और बीपी सामान्य रहने के बावजूद दिल की धड़कन तेज हो सकती है।
डिहाइड्रेशन से भी बढ़ती है हार्टबीट
शरीर में पानी की कमी होने पर खून की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में दिल को तेजी से पंप करना पड़ता है, जिससे धड़कन बढ़ जाती है। इसके अलावा कैफीन का अधिक सेवन, धूम्रपान और कुछ दवाएं जैसे अस्थमा इनहेलर या डीकंजेस्टेंट भी पल्स रेट बढ़ा सकते हैं।
बीमारी का संकेत हो सकती है तेज धड़कन
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की पल्स रेट अधिक रहती है, उनमें दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा पाया गया है, भले ही उनका बीपी सामान्य हो। तेज हार्टबीट भविष्य में हाई बीपी और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।
दिल की धड़कन तेज होने पर क्या करें?
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
- कैफीन और धूम्रपान से बचें
- नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान करें
- संतुलित आहार लें, आयरन और पोषक तत्वों को डाइट में शामिल करें
- सीने में दर्द, सांस फूलना या लगातार तेज धड़कन महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह न माना जाए। किसी भी लक्षण या समस्या की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
